अब एडमिशन में नहीं होगी दिक्कत
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्नातकोत्तर मेडिकल एडमिशन नीट में ओबीसी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण को बरकरार रखा है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और एएस बोपन्ना की पीठ ने यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने ओबीसी की वैधता बरकरार रखी है। ईडब्ल्यूएस में भी वर्तमान क्राइटेरिया बरकरार रखा गया है ताकि इस अकादमिक सत्र के लिए एडमिशंस में दिक्कत न आए। अदालत ने कहा कि वह पांडेय समिति की सिफारिशों को अगले साल से लागू करने को मंजूरी देती है। बेंच ने मार्च के तीसरे हफ्ते में याचिका पर अंतिम सुनवाई करने का फैसला किया। तब पांडेय समिति की ओर से तय ईडब्ल्यूएस क्राइटेरिया की वैधता तय की जाएगी।
अदालत में केंद्र ने क्या कहा.
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 27 फीसदी ओबीसी कोटा और 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षण दिया जा रहा है। यह जनवरी 2019 से लागू है। यूपीएससी में भी यही कोटा दिया जा रहा है। इस मामले में जनरल कैटिगरी को सीटों की हानि नहीं हुई है, बल्कि सीटों की संख्या 25 फीसदी बढ़ा दी गई है। पीजी कोर्स में रिजर्वेशन के लिए कोई मनाही नहीं है।
केंद्र ने मांगी थी काउंसलिंग शुरू करने की इजाजत
गुरुवार को सुनवाई के दौरान केद्र सरकार ने कहा कि काउंसलिंग शुरू करने की इजाजत दी जाए। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने कोटे का विरोध किया। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 29 जुलाई को नोटिफिकेशन जारी कर मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाले नीट परीक्षा में ऑल इंडिया कोटा के तहत ओबीसी को 27 फीसदी और आर्थिक तौर पर कमजोर स्टूडेंट को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है।