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आरक्षण पर जुबानी जंग,कमलनाथ बोले- चलो कोर्ट साथ चलते हैं,क्यों नहीं मिलेगा ओबीसी को न्याय

विधानसभा में मंत्री भूपेंद्र सिंह व पूर्व मंत्री तरुण भनोत भिड़े 

भोपाल। पंचायत चुनाव में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण खत्म किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर विधानसभा में जमकर जुबानी जंग हुई। नजीजतन प्रश्नकाल नहीं हुआ और सदन शुरू होते ही कांग्रेस द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव को मंजूर करने की सहमति देते हुए अध्यक्ष ने इस पर चर्चा शुरू करा दी। चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि यहां पर कहा गया कि, कोर्ट की प्रोसिडिंग है, रिट पेटिशन पर बात हुई लेकिन अभी तीन बातें है जो बाकी हैं। सीमांकन, रोटेशन और आरक्षण पर बात चल रही है। कोर्ट में विवेक तन्खा के साथ आयोग और सरकार के अधिवक्ता भी थे। आपके अधिवक्ता कोर्ट में चुप रहे, वो चाहते तो कोर्ट की टिप्पणी पर अपना पक्ष रख सकते थे लेकिन, आपके अधिवक्ता ने कुछ नहीं कहा। आप चाहते तो दूसरे दिन भी कोर्ट जा सकते थे लेकिन आप भी चुप रहे। मैं तो कहता हूँ कि, आप ओबीसी के हितैषी हैं तो आप और हम एक साथ कोर्ट चलते हैं। जब दोनों कोर्ट चलते हैं, तो कौन सा कोर्ट होगा जहां निष्कर्ष नही निकलेगा। 

बात गलत साबित तो दे देंगे इस्तीफा..............

 इससे पहले प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होने पर विधायक कमलेश्वर पटेल ने कहा कि भारतीय संविधान में उल्लेख है कि पंचायत चुनाव रोटेशन में होना चाहिए। पूर्व पीएम राजीव गांधी ने इस एक्ट को और मजबूत बनाया था। प्रदेश में बिना रोटेशन अधिसूचना जारी की गई जबकि 2019 में कमलनाथ सरकार ने परिसीमन कराया था। तब ग्रामीण जन की सुविधा को ध्यान में रखकर परिसीमन कराया गया था। उन्होंने शिवराज सरकार को घेरते हुए कहा कि यह सरकार जल्दबाजी में निर्णय लेती है। चर्चा के दौरान नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह और कांग्रेस विधायक तरुण भनोत के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस मौके पर मंत्री और विधायक ने अपनी बात गलत साबित होने पर सदन के समक्ष इस्तीफे की धमकी भी द

बोले-मेरी पूरी बात सुनी जाए, कमलनाथ ने कहा मंजूर 

मंगलवार को सदन में नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण नहीं होने पर कांग्रेस स्थगन प्रस्ताव पेश किया है, इस पर चर्चा होनी चाहिए। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इस पर कहा कि चर्चा हो, सरकार इसके लिए तैयार है। यह करोड़ों पिछड़ा वर्ग के लोगों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है लेकिन जब बात कही जाए तो रोकाटोकी नहीं हो। मेरी पूरी बात को सुना जाए। इस पर कमलनाथ ने सहमति दी तो विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा कि कई बार सदन के नेता बोलते हैं तो कई सदस्य सदन के बाहर चले जाते हैं या रोक टोक करते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने स्थगन दिया था, उसे स्वीकार कर लिया चर्चा हो रही है। 

मंत्री बोले-कांग्रेस नेताओं ने 5 याचिकाएं लगाईं, तरुण भनोत बोले-

रोटेशन के खिलाफ, आरक्षण के नहीं.......

 विधायक कमलेश्वर पटेल के स्थगन प्रस्ताव पर जवाब देने के दौरान मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि ओबीसी आरक्षण के खिलाफ पांच याचिका लगाई गई हैं। ये सभी याचिकाएं कांग्रेस के लोगों ने लगाई हैं। इस पर विधायक तरुण भनोत और मंत्री भूपेंद्र के बीच तीखी नोकझोंक हुई। तरुण भनोत ने कहा कि याचिका रोटेशन के खिलाफ है न कि ओबीसी आरक्षण के खिलाफ लगी है। मंत्री सिंह ने कहा कि वे कोर्ट के प्रोसीडिंग के आधार पर जानकारी दे रहे हैं और गलत हुआ तो इस्तीफा दे देंगे। सांसद विवेक तन्खा का भी नाम मंत्री भूपेंद्र सिंह ने लिया। इस पर जमकर हंगामा हुआ और कांग्रेस विधायकों ने कहा कि गुमराह कर रहे हैं। भनोत ने कहा कि महाधिवक्ता और सरकारी वकील पैरवी के लिए खड़े नहीं हुए। इस पर स्पष्टीकरण दें, अगर मेरी बात गलत हुई तो मैं भी इस्तीफा दे दूंगा। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्र ने कहा कि सांसद विवेक तन्खा ने किस तरह से कोर्ट में अपनी बात कही है, उसकी क्लिपिंग दिखा सकते हैं। ओबीसी को तन्खा ने दस पीढ़ी पीछे पहुंचा दिया है। इस बीच विधायक पटेल ने न्यायपालिका पर टिप्पणी कर दी जिसे अध्यक्ष ने विलोपित कराया। इस बीच विधायक बाला बच्चन ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ याचिका में 47 बार सरकार के वकील नहीं पहुंचे। भाजपा सरकार की तो आदत ही यही है।

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