एसआर प्रापर्टीज में फर्जी नोटरी बनकर सहा.आयुक्त के शपथ पत्र पर लगा दी मुहर
December 06, 2021
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लखनऊ कोर्ट में हुआ खुलासा, जबलपुर में दर्ज एफआईआर
जबलपुर। कोतवाली थाना क्षेत्र में बल्देवबाग स्थित एसआर ऑनलाइन रजिस्ट्री एवं सेवा प्रदाता नाम से संचालित एसआर प्रापर्टीज में जालसाजों द्वारा दस्तावेज के फर्जी नोटराइज्ड का खेल उजागर हुआ है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब मूलत: जबलपुर के रहने वाले मुंबई में सहायक आयकर आयुक्त के पद पर पदस्थ अधिकारी के शपथ पत्र में भी जालसाजों ने फर्जी सील साइन कर दिए। लखनऊ में शपथ पत्र की हकीकत सामने आने के बाद आयकर अधिकारी ने कोतवाली थाने में जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कराया है।
कोतवाली पुलिस ने बताया कि गांधीगंज निवासी सहायक आयकर आयुक्त प्रियंक जैन ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि पत्नी तन्वी जैन द्वारा घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के अनुभाग 12 के तहत लखनऊ में वाद दर्ज कराया है। जिसके चलते उन्हें अपनी आय, संसाधनों से संबंधित शपथ पत्र न्यायालय में देना था। विगत 28 अगस्त 2021 को वे शपथ पत्र बनवाने बल्देव बाग स्थित एसआर ऑनलाइन गए। जहां प्रोपराइटर सुमित जैन ने स्टांप उपलब्ध कराते हुए बल्देवबाग कार्यालय में ही बैठे आनंद मोहन चौधरी से नोटराइज्ड कराने कहा। दिनांक 28 अगस्त 2021 को जब वे शपथ पत्र बनवाने अपने मित्र राजदीप साहू के साथ एसआर ऑनलाइन गए तब वहां पर आनंद मोहन चौधरी ने स्टांप पेपर में बाकायदा नोटिस टिकट लगाई, दिनांक, नाम एवं नोटरी की मुहर लगाई तथा एक रजिस्टर में हस्ताक्षर भी कराए। पूरी प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद उन्होंने शपथ पत्र दे दिया। इसके बाद प्रियंक ने 2 सितंबर 2021 को लखनऊ न्यायालय के समक्ष शपथ पत्र पेश कर दिया। 29 अक्टूबर 2021 को लखनऊ में विपक्ष के अधिवक्ता ने प्रियंक को बताया गया कि आनंद मोहन चौधरी का कहना है, कि उन्होंने दिनांक 28 अगस्त 2021 को उनके शपथ पत्र की नोटरी नहीं की थी । पतासाजी करने पर प्रियंक के भाई डॉक्टर मयंक जैन एसआर ऑनलाइन गए तो उन्हें पता चला कि जो व्यक्ति अभी तक अपना नाम आनंद मोहन चौधरी बताता था उसका असली नाम प्रतीक जैन है। उसने बताया कि वह हमेशा ही आनंद मोहन चौधरी के नाम से नोटरी करता है और इसके एवज में आनंद मोहन चौधरी को 10 हजार रुपए महीने देता है। इसलिए आनंद मोहन चौधरी, प्रतीक जैन को अपनी सील मोहर नाम इस्तेमाल करने देता है। इस पूरे मामले में प्रतीक जैन और सुमित जैन के साथ आनंद मोहन चौधरी की भूमिका भी संदिग्ध है।
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