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कब थमेगा उप चुनावों का यह सिलसिला....

 


उप चुनावों की एक खेप निबटती नहीं, अगले उप चुनाव की जमीन तैयार हो जाती है। यह विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार जारी है। एक लोकसभा एवं तीन विधानसभा सीटों के इन उप चुनावों को छोड़ दें तो इनकी आधारशिला राजनीतिक दल खासकर भाजपा ही रखती है। पहले सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस तोड़ी गई। इसके बाद उप चुनाव के दौरान पक्ष में माहौल बनाने के लिए दो विधायकों का दल बदल कराया गया। मौजूदा उप चुनाव कोरोना से एक सांसद एवं तीन विधायकों के निधन के कारण हुए। इन उप चुनावों की प्रक्रिया निबट भी नहीं पाई और भाजपा ने खंडवा लोकसभा सीट के उप चुनाव में जीत के उद्देश्य से एक कांग्रेस विधायक को फिर तोड़ लिया। इससे 6 माह के अंदर एक विधानसभा सीट का उप चुनाव फिर तय हो गया। मजेदार बात यह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कांग्रेस के एक दर्जन विधायक अब भी उनके संपर्क में हैं। अर्थात बात बन गई तो और विधायक टूट सकते हैं। सवाल यह है कि आखिर उप चुनावों का यह सिलसिला कब थमेगा? इससे देश का पैसा बरबाद होता है। लोकतंत्र के लिहाज से भी यह आदर्श स्थिति नहीं है। क्या कोई ऐसी व्यवस्था नहीं होना चाहिए कि दलदबल पर पूरी तरह रोक लग जाए?

-स्तंभकार दिनेश निगम " त्यागी" वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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