प्रदेश की एक लोकसभा एवं तीन विधानसभा सीटों के उप चुनाव इस मायने में अलग हैं कि इस बार ईवीएम सिर्फ उनके भाग्य का फैसला नहीं करेगी जो चुनाव लड़ रहे हैं बल्कि इनमें उनकी राजनीतिक किस्मत भी कैद है जो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा जैसे नेताओं की। ये नेता किसी सीट से प्रत्याशी नहीं है लेकिन ये हर सीट में चुनाव लड़ा रहे हैं। पार्टी के प्रत्याशियों को जिताने की जवाबदारी इनके कंधों पर है। इसी कारण इन उप चुनावों में आम चुनाव जैसी ताकत झोंकी गई। 2 नवंबर को जब ईवीएम से नतीजे निकलेंगे तो प्रत्याशियों के साथ इन नेताओं की भी जीत-हार होगी। इनकी राजनीतिक सेहत पर भी असर पड़ेगा। यह चर्चा पहले से है कि कमलनाथ पर प्रदेश छोड़कर केंद्र की राजनीति में जाने का दबाव है लेकिन वे तैयार नहीं है। यदि नतीजे कांग्रेस के अनुकूल नहीं आए तो उन्हें प्रदेश से हटाकर केंद्र की राजनीति में ले जाया जा सकता है या प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष में से कोई एक पद लेकर उनका राजनीतिक कद घटाया जा सकता है। दूसरी तरफ उप चुनावों के नतीजे मुख्यमंत्री एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का कद घटा-बढ़ा सकते हैं।
-स्तंभकार दिनेश निगम " त्यागी" वरिष्ठ पत्रकार हैं।
ईवीएम में इनकी किस्मत का फैसला भी कैद....
November 02, 2021
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