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हार-जीत का दारोमदार जातीय समीकरणों पर....



- एक लोकसभा एवं तीन विधानसभा सीटों के लिए मतदान की तैयारी में निर्वाचन आयोग से ज्यादा राजनीतिक दल सक्रिय रहे। आयोग को मतदान कराना था और भाजपा-कांग्रेस को वोट हासिल करना थे। प्रचार थमने के बाद हर दल जातीय समीकरण साधने की कोशिश में जुटा। प्रथ्वीपुर में भाजपा द्वारा सपा के शिशुपाल यादव को प्रत्याशी बनाने से अन्य वर्ग नाराज दिखे। सबसे निर्णायक ब्राह्मण हैं। इन्हें साधने के लिए गोपाल भार्गव के साथ पूर्व विधायक अनीता नायक ने मेहनत की। रैगांव में कांग्रेस के पक्ष में  ब्राह्मण और काछी लामबंद हो रहे थे तो भाजपा ने इसकी तोड़ ढूंढ़ने की कोशिश की। खंडवा और जोबट में आदिवासी निर्णायक भूमिका में हैं। इनके संगठन जयस के मुखिया हीरालाल अलावा कांग्रेस के साथ रहे लेकिन अन्य गुट कांग्रेस के खिलाफ। दोनों जगह भितरघात के भी हालात रहे। खंडवा में कांग्रेस ने अरुण यादव को घर बैठाया तो भाजपा ने नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे को। जोबट में भाजपा में कांग्रेस से आर्इं सुलोचना रावत को टिकट देने से नाराजगी दिखी और कांग्रेस में कलावती भूरिया का भतीजा असंतुष्ट रहा। दोनों तरफ से डैमेज कंट्रोल की कोशिश हुई। मतदान हो चुका है। नतीजे बताएंगे कि कौन कितना सफल रहा?

-स्तंभकार दिनेश निगम " त्यागी" वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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