‘स्क्रीन विजन सिड्रोम’ का खतरा पैदा कर रही कम्प्यूटर-मोबाइल पर व्यस्तता
जबलपुर। कोविड संक्रमण के चलते किए गए लॉक डाउन के बीच घर से काम करने के लिए शुरू किए गए ऑनलाइन वर्किग सिस्टम के साइड इफेक्ट अब तेजी से सामने आना शुरू हो गए हैं। ऑनलाइन वर्किग के अत्याधिक प्रयोग से लोगों की आंखों की सेहत बिगाड़ रही है। चौंकाने वाली खबर ये है कि कोविड के बाद ‘स्क्रीन विजन सिड्रोम’ नामक इस बीमारी से पीड़ितों की संख्या में 40 फीसदी तक इजाफा हो गया है। बताया जाता है कि आंख की सेहत को प्रभावित करने वाली स्क्रीन विजन सिड्रोम नाम की इस बीमारी के पीड़ित अस्पतालों की आई-ओपीडी में प्रतिदिन आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि आई-ओपीडी में रोजाना 10 प्रतिशत इस बीमारी से पीड़ित मिल रहे है, जो कि चिंता का विषय है।
क्या कहते हैं नेत्र रोग विशेषज्ञ...........
नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. परवेज सिद्दकी ने बताया कि कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम में एक ही तरह का मोशन होता है, जिससे आंखें बार-बार गुजरती हैं। डॉ सिद्दीकी ने कहा कि आप कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन
के आगे जितना ज्यादा वक्त गुजारेंगे उतनी ही ज्यादा समस्या होगी। ऐसा माना जा रहा है कि विशेषज्ञों की इस राय से कम्प्यूटर व मोबाइल फोन पर अधिक व्यस्त रहने वालों के लिए समस्या सामने आएगी। कम्प्यूटर का इस्तेमाल करने वाले 50 से 90 प्रतिशत लोगों में इनमें से कुछ लक्षण होते हैं। न केवल काम करने वाले व्यस्क लोग कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या से जूझ रहे हैं बल्कि मोबाइल फोन, टैबलेट और गेमिंग उपकरणों का उपयोग करने वाले बच्चों में भी इसके लक्षण देखे गए हैं।
बच्चों में बढ़ रही है डिसीज..............
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शलभ अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 8 से 10 मरीज इस सिड्रोम से पीड़ित आ रहे हैं। सिड्रोम की मुख्य वजह स्क्रीन की तरफ देखते वक्त पलकें झपकाना भूल जाते हैं, कई मिनटों तक पलकें झपकाए बिना स्क्रीन देखने से आंखों की टियर फिल्म (आंसुओं की लेयर) सूख जाती है और उसकी क्वालिटी भी खराब होने लगती है इससे बचने के लिए 20-20-20 का एक खास फॉमूर्ला अपनाने से आपकी दिक्कतें कम हो सकती है। यानी काम के बीच हर 20 मिनट बाद उसी जगह पर बैठकर भी आप एक ब्रेक ले सकते हैं। इस दौरान आपको 20 फीट की दूरी पर सिर्फ 20 सेकेंड के लिए किसी चीज को देखना होगा। इससे आंखों पर लगातार पड़ने वाले दबाव में कमी आती है दूसरा बच्चे या घर के किसी अन्य सदस्य का स्क्रीन टाइम घटाने से परेशानी कम हो सकती है। साथ ही ऐसी समस्या होने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह से ही दवाओं का सेवन करना चाहिए।
** हर्षित चौरसिया की रिपोर्ट