भेड़ाघाट-पंचवटी में दिखने के बाद रहा चर्चा में, वन विभाग ने किया रेस्क्यू
जबलपुर। भेड़ाघाट- पंचवटी से लगे हुए एक कुंड में बीते एक माह से चर्चा में रहा मगरमच्छ आखिर वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। वन विभाग ने पिंजरे में मगरमच्छ को फंसाने के लिए मुर्गे रखे थे, जिनकी लालच उसे पिंजरे तक खींच लाई। जैसे ही मगरमच्छ पिंजरे के अंदर घुसा वन विभाग की रेस्क्यू टीम एक्शन में आ गई। सूचना पर रेंज आफिस से भी तत्काल अमला मौके पर जा पहुंचा। रेस्क्यू टीम प्रभारी डिप्टी रेंजर गुलाब सिंह राजपूत ने बताया कि भेड़ाघाट के पंचवटी घाट से लगे एक कुंड में मगरमच्छ को दीपवाली के दौरान नाविकों ने देखा था। जिसके बाद से वन विभाग की रेस्क्यू टीम उक्त क्षेत्र में निगरानी रख रही थी। मगरमच्छ उक्त कुंड से किसी अन्यत्र स्थान पर न जाए इस बात को ध्यान में रखते हुए वहां जाल डाले गए थे। वहीं एक पिंजरा भी लगाया गया था। मगरमच्छ को पिंजरे में ट्रेप करने के लिए उसमें मुर्गे रखे गए थे। उक्त क्षेत्र में रेस्क्यू टीम के चौबीस घंटे तैनाती रखी गई थी। लिहाजा आज सुबह 6 बजे जब भेड़ाघाट में मौजूद टीम के सदस्यों ने जाकर देखा तो करीब 5 से 6 फुट लंबा मगरमच्छ पिंजरे में कैद था।
पिंजरे से लंबा था मगरमच्छ.........
बताया जाता है कि मगरमच्छ को पकड़ने जो पिंजरा रखा गया था, जब उसमें मगरमच्छ आया तो पिंजरा छोटा पड़ गया। लिहाजा मगरमच्छ को उसमें मूमेंट करने में कठनाई जा रही थी। वहीं वन विभाग के सामने एक चैलेंज यह भी था कि पिंजरे को आखिर नदी से बाहर कैसे लाया जाए। लिहाजा रेस्क्यू टीम के अन्य सदस्यों वन रक्षक विनोद मांझी, धनजय,राजेंद्र, हर्ष सहित करीब आधा दर्जन वन कर्मियों ने पिंजरे को नाव में लोड किया और किसी तरह उसे घाट तक लाया गया।
मगरमच्छ देखने लग गया था हुजूम ..........
पिंजरे में मगरमच्छ कैद होने की खबर जैसे ही फैली तो स्थानीय लोगों के साथ ही साथ जबलपुर से भी बड़ी संख्या में लोग भेड़ाघाट जा पहुंचे। जिसके चलते रेस्क्यू स्थल पर काफी भीड़ एकत्रित हो गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पुलिस बल भी पहुंच गया था।
खंदारी जलाशय में छोड़ा जाएगा ..................
रेस्क्यू टीम प्रभारी के मुताबिक भेड़ाघाट से रेस्क्यू कर निकाले गए मगरमच्छ को डुमना खंदारी जलाशय में छोड़ा जाएगा। वन विभाग का कहना है कि खंदारी जलाशय में मगरमच्छ काफी संख्या में है, इसलिए अधिकारियों ने निर्णय लिया है कि उक्त मगरमच्छ को भी वहीं छोड़ दिया जाए।