अधिकारी-बाबू तंत्र के घालमेल में कोई पूछने वाला नहीं
जबलपुर। किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने शुरु होने वाली प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में भारी घपले की खबर है। दरअसल ,इस योजना के तहत बाह्य पोषित बजट से केंद्र सरकार द्वारा 17.50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अंतर्गत सिंचाई विभाग द्वारा भूमिगत जल सव्रे किया जाना है। इसके लिए पूर्व में 100 से अधिक स्थानों पर पीजोमीटर भी खोद कर डाले जा चुके हैं। बता दें कि पीजोमीटर वह यंत्र है जिससे जमीन के नीचे पानी की स्थिति पता लगाया जाता है, लेकिन उन पीजोमीटर का फिर क्या हुआ इसका भी अता-पता नहीं चल रहा। ताजा खबर यह है कि इस परियोजना के लिए बहुप्रतीक्षित 17.50 करोड़ रुपए की राशि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत की जा चुकी है। इसके बाद से ही भूमिगत जल सव्रे के लिए टेंडर इत्यादि की प्रक्रिया की जाना है। अब यह बताया जा रहा है कि यह सारा कामकाज कागज पर ही निपटा कर बिल निकालने सिंचाई विभाग के भीतर चतुर सुजान बाबू-इंजीनियर का तंत्र सक्रिय हो गया है। जबलपुर और रीवा संभाग के जिले शामिल हैं चूंकि रीवा और जबलपुर संभाग के खास तौर पर आदिवासी बाहुल्य जिले जिसमें मंडला-डिंडोरी-बालाघाट, सीधी-सिंगरौली-अनूपपुर आदि पर इस योजना में फोकस किया जाना है, इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना का यह हाल होना अपने आप में आश्चर्यजनक है। बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही इस राशि का ब्याज राज्य सरकार को भुगतना है। इसमें सोलर पैनल भी लगना प्रस्तावित है। पूर्व में इसी परियोजना के तहत सागर संभाग से एग्रीमेंट कर भी कुछ कार्य किया जा चुका है। विभाग में कोई बात करने तक तैयार नहीं पूर्व में यह प्रस्ताव सेंट्रल वॉटर कमीशन द्वारा भेजा जा चुका था, लेकिन अब जब से यहां नए अधीक्षण यंत्री आरके गुप्ता पदस्थ हो गए हैं तब से परियोजना के संबंध में अता-पता ही नहीं चल रहा। अब हालत यह है कि ना तो कार्यालयीन स्टाफ इस बावद कोई बात कर रहा है न ही प्रभारी आरके गुप्ता से इस विषय पर संपर्क हो सका ।