आदिवासी वोटों की खातिर मप्र में सियासी जमावड़ा
भोपाल । प्रदेश में आदिवासी वोट बैंक को साधने के लिए सियासत तेज हो गई है। आदिवासी गौरव दिवस पर भोपाल में जनजातीय महासम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा के जवाब में कांग्रेस आधा दर्जन जिलों में जनजातीय सम्मेलन करेगी। 15 नवंबर को कमलनाथ जबलपुर में कांग्रेस की ओर से आयोजित जनजतीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन के बाद आधा दर्जन जिलों में भी अगले कुछ महीनों में कांग्रेस जनजातीय सम्मेलन करेगी। जबलपुर में आदिवासी सम्मेलन कर कांग्रेस महाकोशल के आदिवासियों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने जा रही है। साथ ही मोदी के आयोजन के मुकाबले में आदिवासियों के बीच अपनी ताकत बताने जा रही है। इसलिए सम्मेलन में प्रदेश भर से आदिवासियों को आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन की जिम्मेदारी पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोट को सौंपी गई है। गौरतलब है कि आदिवासियों को रिझाने के लिए कांग्रेस ने 6 अगस्त को बड़वानी में एक सम्मेलन किया था। इसके बाद 18 सितम्बर को राजा शंकरशाह-रघुनाथ शाह के शहीदी दिवस पर भाजपा ने आयोजन किया था, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए थे। इसके बाद अब भोपाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं। इस आयोजन के जवाब में कांग्रेस ने भी जबलपुर में इसी दिन जनजातीय सम्मेलन आयोजित करने का ऐलान किया है।
कांग्रेस का चार चरणों में आयोजन
कांग्रेस जनजातीय सम्मेलन चार चरणों में करने वाली है। पहला चरण वह बड़वानी में आयोजित हुई आदिवासी अधिकार यात्र को मानती है। दूसरा चरण की शुरूआत 15 नवंबर को जबलपुर से होगी। इसके बाद महाकौशल के डिंडौरी और मंडला में सम्मेलन आयोजित होंगे। तीसरे चरण में अनूपपुर, शहडोल और उमरिया में सम्मेलन होंगे। चौथे चरण में विंध्य और मालवा क्षेत्र के जिलों में आदिवासी सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।