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न्यू " लाइफ" में था " मौत " का एक दरवाजा, 8 ने गंवाई जिंदगी- नियम-कायदे थे ठेंगे पर

सर्विस रोड पर रखा था जेनरेटर, बिजली आते ही शार्ट सर्किट से लगी आग 

जबलपुर। दमोहनाका-कृषि उजज मंडी रोड पर स्थित न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिटीअस्पताल के भीषण अग्निकांड में 8 लोगों ने जिंदगी गंवा दी और 8 लोग झुलसकर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हादसे के बाद उठे सवालों के जवाब में सिर्फ एक ही तथ्य सामने आया कि एक छोटे से प्लॉट पर बने अस्पताल में नियम-कायदे ठेंगे पर थे। न्यू लाइफ नाम से शुरू अस्पताल में सिर्फ एक दरवाजा प्रवेश और निकलने का था, जो अग्नि हादसे में मौत का दरवाजा बन गया। वहीं अस्पताल के बाहर सड़क किनारे जेनरेटर रखा था जिसमें बिजली आते ही शार्ट सर्किट से चिंगारी भड़की और दर्जन भर लोगों को मौत के मुंह में ले गई। दरअसल, जेनरेटर के बाजू में एक बाइक खड़ी थी जिसमें आग लगते ही अस्पताल से निकलने का रास्ता बंद हो गया और हाहाकार मच गया।

 कारोनाकाल में ऊगा अस्पताल, एक  नेता की पार्टनरशिप चर्चा में

अस्पताल प्रबंधन की ओर से हादसे पर कोई बयान नहीं आया जबकि बताया गया कि यह अस्पताल कोरोना काल में ही खुला था। इसमें डॉ निशिथ गुप्ता, डॉ संजय पटैल के साथ ही दो अन्य मालिक सुरेश सोनी व सूरज पटैल हैं जो कि डॉक्टर नहीं है। बताया जाता है कि समीप ही रसोई गैस का गोदाम है जहां से उपभोक्ताओं को सिलेंडर दिए जाते है, आग यदि फैलती तो इससे भी भीषण अग्निकांड की कल्पना भी नहीं की जा सकती। प्रबंधन बिना फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के अस्पताल नियम-कायदों के विपरीत अस्पताल संचालित कर रहा था। 

 आग में जले मरीज व स्टाफ को पहचानना मुश्किल

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोहपर में बिजली गुल हो गई थी और अस्पताल के कर्मचारियों ने जेनरेटर ऑन किया था। करीब 2: 40 बजे जैसे ही बिजली आई, जेनरेटर में शार्ट सर्किट हुआ और चिंगारी निकलने के साथ ही आग लग गई। जेनरेटर के बाजू में खड़ी बाइक में आग लगते ही लपटें विकराल हो गईं और अस्पताल में घुसने और निकलने का एक मात्र दरवाजा आग की लपटों से घिर गया। इसके बाद दवा की दुकान और रिसेप्सन से लेकर पूरे ग्राउंड फ्लोर फिर ऊपरी मंजिल में आग लग गई। इस दौरान मची भगदड़ और अफरा तफरी में अस्पताल की दो नर्से व एक कर्मचारी आग में झुलस गए और कमरों में भर्ती मरीज भी चपेट में आ गए। बाहर निकलने का रास्ता न होने से करीब 20 लोग आग में झुलस गए। जिन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ा उनकी पहचान मुश्किल हो रही थी। 

 विधायक विनय सक्सेना ने सबसे पहले फायर ब्रिगेड को कॉल किया

बताया जाता है कि अस्पताल में आग लगते ही किसी ने विधायक विनय सक्सेना को फोन पर जानकारी दी। विनय भोपाल के लिए रवाना हुए थे तभी उन्होने तत्काल वापसी करते हुए फायर ब्रिगेड को कॉल किया। बताया जाता है कि तब तक पूरा अस्पताल आग की लपटों की चपेट में आ चुका था। फायर ब्रिगेड के जांबाज कर्मियों ने खिड़की दरवाजे तोड़कर अंदर प्रवेश किया और झुलसे हुए लोगों को बाहर निकाला। एक कर्मचारी के मुताबिक 10 से अधिक लोग जलकर दम तोड़ चुके थे और जिन्हें बचाकर बाहर निकाला गया उन्हें तत्काल मेट्रो व अन्य अस्पताल में भेजा गया। यहां बड़ेरिया मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल की तीन एम्बुलेंस तकनीकि स्टाफ व अधिकारियों के साथ तत्काल पहुंच गईं थी। 

जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौके पर, कमलेश खिड़की से कूदे

 हादसे की जानकारी मिलते ही आईजी उमेश जोगा, एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा, कलेक्टर डॉ इलैयाराजा टी सहित सहित नवनिर्वाचित मेयर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक,विनय सक्सेना, लखन घनघोरिया, अशोक रोहाणी, इंदू तिवारी मौके पर पहुंच गए। जिन लोगों के परिजन या रिश्तेदार अस्पताल में भर्ती थे, वे भी बाहर खड़े-खड़े तड़पते रहे, कुछ ने अंदर जाने का प्रयास भी किया, लेकिन पुलिस की सूझबूझ के चलते परिजन और रिश्तेदार और वहां मौजूद अन्य लोगों की जान बच गई। वहीं घटना स्थल पहुंचे पार्षद कमलेश अग्रवाल खिड़की से कूद कर अंदर पहुंचे थे। 

सीएम दुखी, 5-5 लाख मुआवजे और कमिश्नर से जांच का ऐलान

 मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हादसे पर गहरा दुख जताया और घायलों के उपचार का खर्च सरकार द्वारा वहन करने का वादा किया। सीएम ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख मुआवजा देने तथा घायलों को 50 हजार सहायता देने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर हादसे की जांच के लिए संभाग कमिश्नर बी चंद्रशेखर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है जिसमें संयुक्त संचालक हेल्थ डॉ संजय मिश्र,टीएंडसीपी संचालक आरके सिंह,विद्युत सुरक्षा एसई अरविंद बोहरे को सदस्य बनाया गया है। 

अपुष्ट जानकारी में मृतकों की संख्या 10 से ज्यादा

अग्नि हादसे में अधिकारिक तौर पर 8 मौतों की पुष्टि की गई है,वहीं अपुष्ट सूत्रों ने मरने वालों की संख्या 10  नई है। वहीं आग से झुलसे एक दर्जन लोगों में दो की हालत गंभीर बताई जाती है। मृतकों में नरसिंहपुर निवासी 23 वर्षीय महिमा जाटव, सतना निवासी 24 वर्षीय स्वाति वर्मा, अधारताल निवासी 30 वर्षीय वीर सिंह, पाटन रोड निवासी 42 वर्षीय दुर्गेश सिंह, घमापुर निवासी 19 वर्षीय तन्मय विश्वकर्मा, चित्रकूट निवासी 26 वर्षीय सोनू उर्फ अमर यादव, चित्रकूट निवासी 55 वर्षीय अनुसुईया यादव और एक अन्य शामिल है, जिसकी फिलहाल शिनाख्त नहीं हो पाई है। इसके अतिरिक्त अमित शर्मा, दीपा यादव, रूबी पटेल, रेवालाल बड़करे, हल्कीबाई अहिरवार गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें उपचार हेतु दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

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