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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में ‘खेला हो गया’, संख्या बल होने के बाद भी कांग्रेस बाजी हारी

2 वोट निरस्त होने से पासा पलटा, कांग्रेस ने कहा- 30-30 लाख देकर कराए निरस्त 

जबलपुर। जिला पंचायत के 17 सदस्यों के निर्वाचन में शुरू से भारी पड़ रही कांग्रेस के साथ खेला हो गया। संख्या बल में ज्यादा होने के बाद भी कांग्रेस अपना अध्यक्ष नहीं बनवा पाई और एक-एक वोट की घमासान के बीच भाजपा ने पासा पलट दिया। भाजपा समर्थित संतोष बरकड़े इस कशमकश के बीच हारी बाजी जीतकर अध्यक्ष बन गए। विधायक संजय यादव ने कहा कि भाजपा नेताओं ने पहले जिला पंचायत सदस्य के पति का अपहरण करवाकर दबाव बनाया फिर 30-30 लाख रुपए देकर वोट निरस्त करवाने की साजिश रची। 

 वोट निरस्त होते ही भाजपा के पाले में गया चुनाव

 जिला पंचायत सदस्य के 17 सदस्यों के निर्वाचन में 9 वोट से बढ़त हासिल करने का दावा कर रही कांग्रेस मान कर चल रही थी कि जिला पंचायत अध्यक्ष पर कांग्रेस का ही कब्जा होगा। कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्यों में संख्या बल अधिक होने से इतनी जोड़तोड़ का अंदाजा कांग्रेस को भी नहीं था जितनी भाजपा नेताओं की रणनीति ने कर डाली। शुक्रवार को अध्यक्ष के चुनाव की वोटिंग के समय दो वोट निरस्त होने के बाद जीत के समीकरण भाजपा की तरफ चले गए और जिला पंचायत अध्यक्ष में भाजपा समिर्थत संतोष बरकडे 8 वोट हासिल कर अध्यक्ष निर्वाचित हो गए। कांग्रेस जहां 9 वोटों का दावा कर रही थी मतगणना के बाद कांग्रेस समर्थित राजकुमार सैयाम को 7 मत मिले। वहीं 2 वोट निरस्त हो गए। नवनिर्वाचित अध्यक्ष बने संतोष बरकडे सिहोरा विधानसभा के पडरिया गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने क्षेत्र क्र मांक 7 से कांग्रेस के दिग्गज आदिवासी नेता नन्हें लाल धुर्वे और खिलाड़ी सिंह आर्म को पराजित किया था। जिला पंचायत उपाध्यक्ष के चुनाव में विवेक पटेल को 9 और सत्येंद्र सिंह को 8 वोट मिले।

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