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जिपं अध्यक्ष चुनाव के " कौन हैं वो 2 गद्दार " ? कांग्रेस अब निकायों के अध्यक्ष चुनने पार्षदों को देगी महत्व

नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस सतर्क 

जबलपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में संख्या बल होने के बाद भी बाजी हाथ से फिसलने को लेकर कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने खासी नाराजी जताई है। पार्टी अब नगर पालिका व नगर परिषदों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव में विधायकों से ज्यादा निर्वाचित पार्षदों की राय को महत्व देगी,इसमें कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़े और जीते पार्षदों से समन्वय बनाने का काम जिला अध्यक्ष व प्रभारियों को सौंपा गया है। जबलपुर में जिन कांग्रेस नेताओं, विधायकों को जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी उनसे जवाब मांगा गया है, वहीं ‘कौन हैं वो 2 गद्दार’को लेकर पार्टी ने गंभीरता से कार्रवाई करने कहा है।

 प्रदेश कांग्रेस कमेटी हर निकाय पर रखेगी सीधे नजर

. जिला पंचायत और जनपद पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बड़ी पराजय का सामना करने के बाद कांग्रेस अब नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। जिन नगर पालिका व नगर परिषदों में बहुमत होने के कारण अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुना जा सकता है, उस पर भी प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नजर है, वहीं जिन निकायों में बहुमत नहीं है वहां पार्षदों को एकजुट होकर अपनी रणनीति से अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद पर काबिज होने की नीति पर काम करने कहा गया है। अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के लिए विधायक की जगह पार्षदों की राय को ज्यादा महत्व मिल सकता है। बहुमत वाली सीटों पर कांग्रेस अपना अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष बनवाने का कोई मौका नहीं खोना चाहती है। इसके लिए कमलनाथ की कोर टीम और प्रदेश कांग्रेस के चुनिंदा पदाधिकारियों ने मिलकर रणनीति बनाई है।

 वोट निरस्त होने या करवाने की साजिश का होगा पर्दाफाश

 जबलपुर जिला पंचायत के 17 वोटों में स्पष्ट रूप से कांग्रेस समर्थित 9 सदस्य होने के बाद भी पार्टी जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं बना पाई और संख्या कम होने पर भी भाजपा ने अपनी रणनीति में सफल होते हुए अध्यक्ष पद पर 6 वोटों की संख्या होने पर भी जीत हासिल कर ली। कांग्रेस के अंदरखानों में उन दो सदस्यों को गद्दार करार देकर सामने लाने की बात कही जा रही है जिनके वोट निरस्त हुए। बल्कि ये कहा जा रहा है कि मतपत्र पर मुहर लगाने में जानबूझकर गल्ती करने के पीछे छिपी साजिश का खुलासा करने दबाव बनाया जा रहा है। इसमें पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश पटैल का नाम लिया जा रहा है जिन्होने अपने भाई विवेक पटैल को उपाध्यक्ष बनाने की नीति के तहत काम किया, वहीं एक अन्य सदस्य का नाम उजागर करने और कार्रवाई करने की बात कही जा रही है। हालांकि विधायक संजय यादव खुला आरोप लगा चुके हैं कि वोट निरस्त करवाने की साजिश के तहत सदस्यों को 30-30 लाख रुपए दिए गए। अब इस मामले की सच्चाई सामने आना बाकी है।

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