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उद्धव ठाकरे का इस्तीफा, बोले- नहीं चाहता शिवसैनिकों का खून बहे, सुको से राहत नहीं

महाराष्ट्र का राजनीतिक संकट, फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश 

नई दिल्ली। शिवसेना में बगावत के कारण बना महाराष्ट्र का राजनीतिक संकट आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार रात शिवसेना की दलीलों को खारिज करते हुए गुरु वार को ही फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दे दिया। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इसके तत्काल बाद पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि वे शिवसैनिकों का खून बहते देखना नहीं चाहते। साथ ही दावा किया कि शिवसेना उनसे कोई छीन नहीं सकता। ठाकरे ने विधान परिषद से भी फ्लोर टेस्ट के पहले इस्तीफा दे दिया है। उद्धव ठाकरे ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर एकनाथ शिंदे गुट के गिले-शिकवे पर अपनी बात रखी और कहा कि उन्हें अपनी बात सही ढंग से रखना थी। उद्धव ने कहा कि जिनसे धोखे की आशंका थी वे साथ रहे। उन्होंने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार को धन्यवाद कहा।

 मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके थे कि पद छोड़ देंगे

राज्यपाल द्वारा फ्लोर टेस्ट कराने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई शिवसेना को राहत नहीं मिली। कोर्ट ने बुधवार रात शिवसेना की दलीलों को खारिज करते हुए गुरु वार को ही फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दे दिया। सीएम उद्धव ठाकरे पहले ही कह चुके थे कि यदि फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश होगा तो वे पद से इस्तीफा दे देंगे। 

नवाब मलिक व देशमुख को जेल से लाया जाएगा

 सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार शाम को 3 घंटे 10 मिनट तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। शिवसेना ने फ्लोर टेस्ट के खिलाफ, जबकि शिंदे गुट और राज्यपाल के वकील ने फ्लोर टेस्ट के पक्ष में दलीलें पेश कीं। शाम 5 बजकर 18 मिनट से 8 बजकर 28 मिनट तक सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरिक्षत रख लिया था। कोर्ट ने जेल में बंद महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक और अनिल देशमुख को भी वोटिंग में हिस्सा लेने की इजाजत दे दी। कोर्ट ने कहा कि दोनों चुने हुए विधायक हैं और उन्हें विधानसभा में वोटिंग के बाद फिर जेल ले जाया जाएगा।

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