बूथ-यूथ और संगठन के महत्व को निकाय चुनाव में नकारा
जबलपुर। नगरीय निकाय चुनाव में बूथ-यूथ और संगठन के महत्व
को नकारने की पृवत्ति से भाजपा का जमीनी कार्यकर्ता हैरत में है। दरअसल, मेयर पद के प्रत्याशी के लिए ‘ऊपर ही ऊपर’ चल रही गतिविधियों से वे कार्यकर्ता निराश हैं जिन्हें हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के प्रवास में समर्पण और संगठन की सेवा की घुट्टी पिलाई गई थी। भाजपा में मेयर पद के दावेदारों में नए नाम जुड़ने से पार्टी के भीतर समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं, वहीं पार्षद पद के लिए योग्य प्रत्याशी के चयन में फिलहाल जमीनी स्तर पर मंडल पदाधिकारियों की पूछ-परख न होने से बूथ के कार्यकर्ता भी निराश हैं। उनका मानना है कि सब कुछ ‘ऊपर’ ही तय होना है तो पार्टी दिग्गजों की मंशा निर्थक ही साबित होगी।
संगठन के फीडबैक पर कौन उतरेगा खरा
पार्टी सूत्रों की मानें तो कोर ग्रुप की बैठक के बाद जबलपुर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन मंत्री हितानंद शर्मा के साथ राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव की अचानक रात में हुई बैठक में मेयर पद के दावेदारों पर चर्चा हुई थी,लेकिन संगठन को मिले फीडबैक में कौन दावेदार खरा उतरेगा इसका निर्णय चुनाव समिति की बैठक में लिया जाएगा। जबलपुर में जिन दावेदारों के नाम सामने आए उनमें पूर्व नगर निगम अध्यक्ष राजेश मिश्र, पूर्व युवा मोर्चा अध्यक्ष डॉ अभिलाष पाण्डेय और श्रीराम शुक्ला का नाम भी जुड़ गया है। वहीं जेएमसी के पूर्व कमिश्नर आईएएस वेद प्रकाश, डॉ जितेंद्र जामदार,कमलेश अग्रवाल,सदानंद गोडबोले,संदीप जैन,अनुराग सोनी आदि के नामों पर विचार किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि पार्टी चौंकाने वाला नाम सामने ला सकती है।
पार्षद टिकट के साथ बहुमत पर भी भाजपा का जोर
मेयर पद पर प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव की तैयारी के साथ भाजपा सदन में पार्टी के बहुमत पर भी ध्यान देते हुए पार्षद की टिकट के लिए फूंक-फूंककर कदम उठाएगी। सूत्रों ने बताया कि शहरी क्षेत्र में भाजपा के विधायक कम होने के कारण पार्षद टिकट के लिए विधायकों का दबाव नहीं है, लेकिन पराजित प्रत्याशी भी अपने समर्थकों को टिकट दिलाने का आश्वासन दे रहे हैं। संगठन ने भले ही इस पर तवज्जो नहीं दी, लेकिन मंडल स्तर के पदाधिकारियों को ये मलाल है कि पार्षद प्रत्याशी चयन के लिए संगठन ने कोई रायशुमारी नहीं की। नगर निगम सदन के पिछले कार्यकाल में भाजपा और कांग्रेस के बीच संख्या बल में सिर्फ 13 अंक का फासला था। भाजपा के 42, कांग्रेस के 29, शिवसेना के 2 और 6 निर्दलीय पार्षद थे। भाजपा बूथ-यूथ और संगठन के बल पर इस बार सदन में अच्छा बहुमत लाना चाहती है, लेकिन मैदानी कार्यकर्ता और मंडल स्तर पर तैयारी फिलहाल दिख नहीं रही।
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