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सियासी पारा उछला-:सीएम शिवराज, नरोत्तम, भूपेंद्र अचानक दिल्ली गए, ईसी चुनाव के लिए तैयार

ओबीसी पर सुप्रीम फैसले ने बदले समीकरण, कांग्रेस-भाजपा दोनों 27 प्रतिशत देंगे टिकट 

भोपाल। ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक समीकरण, दलगत गतिविधियां और चुनाव आयोग की तैयारियों से भरी गर्मी में सियासी पारा उछल गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्र व नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह अचानक दिल्ली पहुंच गए। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उन्हें भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बुलाया है। इधर, राज्य निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह ने कहा है कि पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव 30 जून तक कराए जाएंगे,इसके लिए समीक्षा की गई कि यदि आज हमें चुनाव डिक्लेयर करना हो, तो क्या हम इसके लिए तैयार हैं? हमारी तैयारी पूरी है।

 सुप्रीम कोर्ट में मोडिफिकेशन पर हो सकती है चर्चा

सीएम शिवराज सिंह चौहान सहित गृहमंत्री के अचानक दिल्ली जाने से राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। दरअसल, मध्यप्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव को बिना ओबीसी आरक्षण कराए जाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद राजनीति माहौल गर्म हो गया है। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पार्टी अध्यक्ष ने इन नेताओं को दिल्ली बुलाया है। मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में मोडिफिकेशन एप्लीकेशन देगी और इसके लिए वे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अधिवक्ताओं के पैनल से भी चर्चा करेंगे। शिवराज सिंह ने अपना विदेश दौरा रद्द कर दिया है। 

पाटी नेतृत्व बताएगा अगला कदम क्या हो सरकार का

 इससे पहले भी सीएम शिवराज सिंह को पीएम नरेंद्र मोदी ने अचानक दिल्ली बुलाया था। ये बुलावा तब आया था जब गृहमंत्री अमति शाह भोपाल दौरे पर थे और अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने दिल्ली पहुंचकर पीएम से मुलाकात की थी। अब एक बार फिर शिवराज सिंह, नरोत्तम मिश्र और भूपेंद्र सिंह को एक साथ दिल्ली से बुलावे को लेकर राजनीति गरमा गई है। चूंकि डॉ नरोत्तम मिश्र विधि मंत्री भी हैं, इस लिहाज से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार का अगला कदम क्या हो, इस पर महत्वपूर्ण चर्चा होगी। 

दोनों दलों में बढ़ी ओबीसी दावेदारों की पूछपरख

ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मुद्दा राजनीतिक गलियारों से निकलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अब पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण कराने के परिदृश्य में ओबीसी चेहरों की दोनों दलों में पूछपरख बढ़ गई है। कांग्रेस का दावा है कि कमलनाथ सरकार ने पहले ही ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया था, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ चुनावों में ओबीसी उम्मीदवारों को 27 प्रतिशत से अधिक पार्टी टिकट देंगे। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस कर बुधवार को कहा कि योग्यता रखने वाले ओबीसी कार्यकर्ताओं को 27 प्रतिशत से अधिक सीटों पर उम्मीदवार बनाया जाएगा। वीडी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग के साथ छलावा किया, वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि कांग्रेस ही ओबीसी वर्ग की सच्ची हितैषी है और भाजपा ने इस मामले को उलझाकर स्पष्ट कर दिया कि ओबीसी के साथ शिवराज सरकार धोखा करती आई है।

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