सरकार बदलने जा रही है नियम, सीधे जनता चुनेगी मेयर व अध्यक्ष
भोपाल। नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर बनी उलझन के बीच मेयर बनने का सपना देखने वालों के लिए अच्छी खबर है। उन्हें मेयर बनने के लिए पहले पार्षदी का चुनाव लड़ने की मशक्कत न करना पड़ेगी। खबर है कि राज्य सरकार नया अध्यादेश लेकर आ रही जिसके तहत नगर निगम के मेयर व नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष अब सीधे जनता चुनेगी। नगरीय निकायों के लिए कमलनाथ सरकार ने प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने का नियम बदल दिया था जिसे शिवराज सरकार बदलने वाली है। नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने शनिवार को दोपहर इसके संकेत दे दिए थे और जानकारी के मुताबिक शाम को नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर विधि विभाग को भेज दिया है।
कांग्रेस सरकार में भाजपा ने किया था विरोध
इससे पहले कमलनाथ सरकार ने अप्रत्यक्ष प्रणाली (पार्षदों को मेयर चुनने का अधिकार) से चुनाव कराने का निर्णय लिया था। जैसे ही शिवराज सिंह चौहान चौथी बार सत्ता में आए, उन्होंने कमलनाथ सरकार के इस फैसले को एक अध्यादेश के जरिए पलट दिया था, लेकिन इसे विधानसभा में डेढ़ साल तक पेश नहीं किया। इससे कमलनाथ सरकार के समय बनाई गई यह व्यवस्था आज भी प्रभावी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में नगर निगम के मेयर और नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से ही होगा। पहले मेयर और पार्षद के लिए अलग-अलग मतदान होता था, लेकिन कांग्रेस ने इस व्यवस्था को बदल दिया। विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने इसका विरोध किया,लेकिन तत्कालीन राज्यपाल ने संवैधानिक व्यवस्था का हवाला देते हुए अध्यादेश और फिर विधेयक को अनुमति दे दी थी।
विरोध के बावजूद विधायकों के दबाव में निर्णय नहीं
भाजपा ने विधानसभा में भले ही अप्रत्यक्ष प्रणाली का विरोध किया था, लेकिन शिवराज सरकार ने विधायकों के दबाव में निर्णय नहीं लिया। दरअसल, विधायक चाहते हैं कि पार्षदों से चुनकर मेयर व अध्यक्ष बनें ताकि क्षेत्रीय राजनीति में विधायकों का दबदबा बना रहे। पार्षदों द्वारा मेयर व अध्यक्ष चुने जाने में विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, वहीं खरीद-फरोख्त में भी लाखों के वारे-न्यारे होते हैं। वहीं प्रत्यक्ष प्रणाली यानि सीधे जनता द्वारा मेयर चुने जाने पर वे राजनीतिक कद में विधायक से बड़े हो जाते हैं और नगर सरकार का मुखिया होने के नाते मेयर का दबदबा ज्यादा होता है। लेकिन अब भाजपा सरकार नगरीय निकायों में अपने मेयर व अध्यक्ष ज्यादा बनाकर नगर सरकार में अपना दबदबा बनाने को ही उचित मान रही है।
