Type Here to Get Search Results !

एक डॉक्टर के नाम पर नहीं चलेंगे कई अस्पताल,निजी अस्पताल बोर्ड में नाम भी नहीं लिख सकेंगे

कोरोनाकाल में बढ़ी अस्पतालों की संख्या पर सरकार ने कसी नकेल

 भोपाल। बीते 2 सालों में प्रदेश के प्रमुख शहरों में अचानक बढ़ी निजी अस्पतालों की संख्या और चिकित्सा सेवा में मिल रही खामियों पर सरकार ने निजी अस्पतालों पर नकेल कसी है। अब एक ही डॉक्टर के नाम से कई अस्पताल नहीं चलेंगे और न ही अलग-अलग अस्पताल के बोर्ड में नाम लिखा जा सकेगा। बतौर कंसल्टेंट डॉक्टर को अधिकतम तीन अस्पतालों में जाने की छूट रहेगी। दरअसल, कोरोनाकाल में कई ऐसे निजी अस्पताल खुले हैं जिनमें एक ही चिकित्सक को रेजिडेंट डॉक्टर बताकर कई प्रायवेट अस्पताल पंजीयन करा लेते हैं। ऐसे अस्पतालों और नर्सिग होम के फर्जीवाड़े को रोकने स्वास्थ्य विभाग ने नए नियम लागू किए हैं। 

स्वास्थ्य विभाग ने किया है नियमों में संशोधन

 स्वास्थ्य विभाग ने मप्र उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) नियम 1997 में संशोधन किया है। अब रेजिडेंट रेगुलर मेडिकल प्रेक्टिशनर (आवासी रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी) के तौर पर एक डॉक्टर सिर्फ एक ही नर्सिग होम में रजिस्टर्ड हो सकेगा। बतौर कंसल्टेंट डॉक्टर उसे अधिकतम तीन अस्पतालों में जाने की छूट रहेगी। लेकिन कंसल्टेंट्स के तौर पर निजी अस्पताल उसका नाम अपने बोर्ड या अस्पताल में नहीं लिखवा पाएंगे। 

लोगों को सही जानकारी और अच्छा इलाज मिले : हेल्थ कमिश्नर

स्वास्थ्य आयुक्त डॉ.सुदाम खाड़े का कहना है कि कई बार ऐसी शिकायतें मिलतीं रहीं हैं कि एक डॉक्टर के नाम से कई नर्सिग होम और निजी अस्पताल चल रहे हैं। जबकि वास्तविकता में वह डॉक्टर वहां कई बार उपलब्ध नहीं होता। ऐसे में मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज नहीं मिल पाता। अब रेजिडेंट डॉक्टर्स के नाम का उपयोग एक से ज्यादा अस्पताल में नहीं किया जा सकेगा। सरकार चाहती है कि लोगों को सही जानकारी और अच्छा उपचार मिले।

Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.