बारहा, भीटा-उमरिया के बाद अग्नि हादसे से उठे सवाल
जबलपुर। झुलसा देने वाली गर्मी के बीच जबलपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत बारहा, भीटा-उमरिया के बाद गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात नागाघाटी के जंगल में आग भड़क गई। हालांकि वन क्षेत्रों में लग रही आग की घटनाओं को छिपाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है, लेकिन खबर मिली है कि कैम्पा प्रोजेक्ट के तहत किए गए प्लांटेशन जलकर खाक हो गए। दरअसल अधिकारियों को पता है कि जब वे जंगल नहीं जाते तो और कोई क्यों जाएगा, मतलब जंगल में ‘मोर नाचा किसने देखा’। इस लाइन पर वन महकमे के जिम्मेदार बिना संकोच किए बोल देते हैं कि हमारे प्लांटेशन और जंगल पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन हकीकत इसके परे है। इस वर्ष जबलपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्रों और प्लांटेशन में आग लगने की घटना अधिक हुई हैं। इसके पीछे गर्मी के पूर्व वन क्षेत्रों में किए जाने वाले अग्नि सुरक्षा कार्य में बरती गई लापरवाही मुख्य वजह बताई जा रही है।
5 हजार हेक्टेयर में किया गया है प्लांटेशन
बताया जाता है कि नागाघाटी में करीब 5 हैक्टेयर से ज्यादा भूमि में कैंपा प्रोजेक्ट के तहत मिश्रित प्लांटेशन किया गया था। दरअसल,कैंपा प्रोजेक्ट के तहत वन विभाग की भूमि किसी दीगर उपयोग में लिए जाने की स्थिति में सरकार द्वारा विभाग को मुआवजा दिया जाता है। उस मुआवजा राशि का उपयोग कैंपा प्रोजेक्ट के प्लांटेशन के लिए वन विभाग की भूमि पर किया जाता है। इस प्रोजेक्ट में शर्त रहती है कि 90 फीसदी पौधे सुरक्षित रहने चाहिए। सूत्रों की मानें तो नागाघाटी में कैंपा प्रोजेक्ट के तहत किए प्लांटेशन में आग लगने से काफी नुकसान पहुंचा है। जंगल की आग को विभाग से तो छुपाया नहीं जा सकता, क्योंकि वहां तो सेटेलाइट से मॉनटरिंग चल रही है। लिहाजा रिकॉर्ड में आग नरवाई के कारण लगना बताकर, पौधों को सुरक्षित होना बता दिया जाता है। ऐसा कहा जा रहा है कि प्लांटेशन फेल होने की स्थिति में नाकामी छिपाने गर्मी में आग लगाई जाती है, वहीं अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब मिलता है कि जांच की रही है।
