भाजपा ने चौंकाया, पं. भवानी प्रसाद तिवारी सभाकक्ष का गौरव बढ़ा
जबलपुर। 1993 में भाजपा में शामिल होकर 99 में पहली बार पार्षद बनने वालीं सुमित्र बाल्मीक के रूप में जबलपुर को तीसरा सांसद मिलेगा। वे राज्यसभा के लिए भाजपा द्वारा प्रत्याशी बनाईं गईं हैं। वे नगर निगम के पं भवानी प्रसाद तिवारी सदन से उच्च सदन जाने वाली पहली महिला नेता हैं। भाजपा ने उन्हें सामान्य सीट होने के बाद भी नगर निगम अध्यक्ष बनाया था। शहरी राजनीति में विनम्र और सुसंस्कारित महिला के रूप में पहचान रखने वालीं सुमित्र बाल्मीकि तीन बार पार्षद और एक बार मनोनीत पार्षद रहीं हैं। नगर निगम की सफल अध्यक्ष रहने के उन्हें सभा संमत विधि विधान में निष्णात नेता रूप में देखा जाता है। कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद मुकेश राठौर ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अध्यक्ष के रूप में सर्वमान्य रहीं सुमित्रा बाल्मीकि के राज्यसभा में जाने से नगर निगम का गौरव बढ़ा है।
खुद को नहीं थी उम्मीद, वीडी शर्मा व सीएम के फोन से मिली जानकारी
साफ सुथरी राजनीति करने वाली सुमित्रा बाल्मीकि को खुद ये उम्मीद नहीं थी, कि पार्टी उन्हें इतने बड़े पद से नवाजेगी। आम कार्यकर्ता मान रहा था कि सुरक्षित सीट जबलपुर पूर्व और गोटेगांव से चूंकि पार्टी हार चुकी है, इस कारण यदि श्रीमती बाल्मीकि को उपकृत करना है तो पार्टी इन दो में से किसी एक सीट से चुनाव लड़ा सकती है, लेकिन सोमवार की रात 10 बजे आए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के फोन कॉल ने उन्हें चौंका दिया। उन्हें राज्यसभा प्रत्याशी बनाया जायेगा, इसकी जानकारी या उम्मीद सत्ता-संगठन के किसी भी घाघ को नहीं थी।
चौधरी, चिनपुरिया, त्रिपाठी, रत्नकुमारी, विवेक तन्खा के बाद जबलपुर से छटवां नाम
राज्यसभा की बात करें तो वे जबलपुर से इस सदन तक पहुंचने वालीं सुमित्रा बाल्मीकि छटवीं नेता होंगी। जबलपुर से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व नारायण चौधरी, रत्नकुमारी देवी,शिवप्रसाद चिनपुरिया, चंद्रिका प्रसाद त्रिपाठी कर चुके हैं। विवेक तन्खा को दूसरी बार कांग्रेस ने रास प्रत्याशी बनाया है, और अब श्रीमती बाल्मीकि को इस योग्य समझा गया है। सूत्र बताते हैं, कि पार्टी ने गहन पड़ताल और सव्रे के बाद सुमित्र बाल्मीकि का नाम फाइनल किया है।
वीकल फैक्टरी से रिटायर पति को खोया, शादी के बाद पढ़ाई की
रांझी के अम्बेडकर वार्ड में रहने वाली सुमित्र बाल्मीकि ने संघर्ष भरे जीवन में 31 दिसंबर 2019 को पति गुरुचरण को खो दिया, गुरुचरण बाल्मीकि व्हीकल फैक्टरी से सेवानिवृत्त थे। सुमित्र बाल्मीकि के जीवन का यह फलसफा भी महत्वपूर्ण है कि उन्होने विवाह के बाद पढ़ाई की और बीए की डिग्री हासिल। उनकी दो बेटियां और एक बेटा है।
