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ओबीसी आरक्षण पर भाजपा सरकार का दांव, सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका मंजूर

ट्रिपल टेस्ट की निकायवार रिपोर्ट पेश, 17 मई को होगी सुनवाई 

भोपाल। पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम आदेश के बाद शिवराज सरकार ने एक और दांव चला है। प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। इसी बीच राज्य सरकार ने ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका (एप्लीकेशन फॉर मॉडिफिकेशन) दाखिल की है जिसे जिसे स्वीकार कर लिया है। सरकार ने इसमें ट्रिपल टेस्ट की निकायवार तैयार रिपोर्ट पेश की है, इस आधार पर आरक्षण देने के लिए दावा किया है। यह भी बताया कि पंचायतों के लिए आरक्षण प्रक्रि या 15 दिन में कैसे पूरी होगी। इस याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 17 मई को सुनवाई होगी।

 गृहमंत्री ने कहा कि हम चुनाव रुकवाने नहीं गए सुप्रीम कोर्ट

 गृहमंत्री नरोत्तम मिश्र ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंप दी है। चुनाव की तारीख भी आएगी और चुनाव भी होंगे। हम चुनाव रु कवाने नहीं गए हैं, बल्कि मॉडिफिकेशन के लिए गए हैं। गृहमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट से समय मांगने के पीछे के दो कारण बताए। उन्होंने कहा कि यदि हम 2019 का परिसीमन लें या फिर 2022 का, इसमें कहीं-कहीं पर नगर पालिका में, ग्राम पंचायत में उसका रूप परिविर्तत हो गया है। स्वरूप बदलने से भ्रम की स्थिति पैदा होगी कि चुनाव नगर पालिका के हिसाब से कराएं या नगर पंचायत के हिसाब से कराएं या ग्राम पंचायत के हिसाब से कराएं, इसलिए समय मांगा गया है।

 गौरतलब है, इससे पहले अधूरी रिपोर्ट के कारण सुप्रीम कोर्ट ने बगैर ओबीसी आरक्षण के ही स्थानीय चुनाव कराने के आदेश दिए थे। उधर, राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है, लेकिन अब सरकार की याचिका मंजूर होने से फिर से संकट के बादल मंडराते दिख रहे हैं। सरकार किसी भी हाल में बगैर आरक्षण चुनाव नहीं कराना चाहती, इसलिए उसने आखिरी दांव खेला है।

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