संडे टू संडे धरना देकर बंद का आयोजन करने वाले सामाजिक संगठन निराश
जबलपुर। विधायक नंदनी मरावी के साथ सीएम हाउस गई लक्ष्य सिहोरा आंदोलन समिति को उस समय झटका लगा जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सिहोरा को जिला बनाने की मांग यह कहकर ठुकरा दी कि नहीं बनेगा सिहोरा जिला, वे ऐसी बात सुनना नहीं चाहते जो पूरी न हो सके। मुख्यमंत्री रहते उमा भारती की घोषणा के बाद से सिहोरा को जिला बनाने की मांग चली आ रही है और बीते लम्बे समय से लक्ष्य सिहोरा आंदोलन समिति के बैनर तले हर संडे को सामाजिक, व्यापारिक व अन्य संगठन धरना देकर यह मांग कर रहे हैं।
समिति का तर्क, 2003 में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है
विधायक नंदनी मरावी के साथ सिहोरा के भाजपा नेता भी समिति के साथ भोपाल गए थे, जिन्हे न केवल निराशा हाथ लगी बल्कि सीएम की दो टूक से झटका भी लगा। कहा जा रहा है कि समिति व भाजपा नेताओं को सीएम के सिहोरा के प्रति ऐसे रवैये की किसी को उम्मीद नहीं थी। समिति ने अपने ज्ञापन में बताया कि 2001 से 2003 के बीच सिहोरा को जिला बनाने की समस्त विभागीय प्रक्रि या पूर्ण की जा चुकी है। जल्द से जल्द सिहोरा में कलेक्टर और एसपी की पदस्थापना की जाए। समिति ने अपने ज्ञापन में यह भी बताया कि सिहोरा को जिला बनाने में शासन को वर्तमान में कोई व्यय भार नहीं आएगा।
अब आंदोलन तेज होगा, जनता के समर्थन से सरकार को झुकाएंगे
लक्ष्य सिहोरा जिला आंदोलन समिति सीएम के रवैये से निराश जरूर है, लेकिन आंदोलन को अब तेज करने की घोषणा की है। समिति के विकास दुबे, अनिल जैन, सियोल जैन, मानस तिवारी, सुशील जैन, अमित बख्शी ने मुख्यमंत्री के सिहोरा के प्रति ऐसे रवैये को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होने कहा कि सिहोरा ने विधानसभा और लोकसभा में भाजपा को लगातार 18 वर्षो से चुनाव जिताया, लेकिन भाजपा के लिए सिहोरा केवल एक सुरक्षित क्षेत्र के अलावा कुछ नहीं है। समिति ने संकल्प दोहराते हुए कहा कि सरकार को सिहोरा जिला बनाना पड़ेगा और जनसमर्थन के साथ आंदोलन तेज किया जाएगा।
