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नगर निगमों में मेयर जनता चुने या पार्षद? सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते हो सकती है सुनवाई

बदलते राजनीतिक घटनाक्रम और आयोग की तैयारियों से पहले आई सूचना 

जबलपुर। पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव के लिए तेज होती जा रहीं राजनीतिक-प्रशासनिक गतिविधियों के बीच मेयर का चुनाव पार्षदों से कराने वाले मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले सप्ताह सुनवाई तय कर दी है। चूंकि विगत दिनों ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के ही दिशा-निर्देशों के बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मध्यप्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसलिए ऐसे में यह मामला अपने आप में महत्वपूर्ण हो जाता है कि मेयर चुनाव को लेकर देश की शीर्षस्थ अदालत का रुख क्या रहने वाला है। 

 पहले पार्षद चुनते थे फिर जनता ने चुना अब क्या ?

. बता दें कि इसके पहले भाजपा शासन तक आयोग द्वारा मेयर का चुनाव जनता से मतदान करा कर किया जा रहा था, जबकि मात्र 15 महीनों के लिए आई कांग्रेस सरकार ने इसे पार्षदों के माध्यम से कराने का नियम बना दिया था। इसके खिलाफ भाजपा ने हाईकोर्ट में याचिका और फिर रिव्यु पिटीशन दाखिल कर दी थी जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस बीच बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के चलते एक बार फिर भाजपा ने सरकार बना ली और कांग्रेस शासन के समय बदली गई व्यवस्था दोबारा लागू कर दी। इसके चलते फिर से मध्यप्रदेश में पार्षदों के माध्यम से मेयर का चुनाव किया जाना अभी तक तय है। 

 याचिकाकर्ता के वकील मिले सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार से

उधर, हाईकोर्ट से पिटीशन खारिज होने के बाद इसी मामले को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे ने बताया कि उनके वकील अक्षत श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को बताया है कि मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी होने वाली है। इसलिए जल्द सुनवाई की जाना आवश्यक है। चूंकि मामला प्रक्रियाधीन है इसलिए अगले सप्ताह किसी भी दिन सुनवाई की जा सकती है।

 शीघ्र अधिसूचना जारी होने की संभावना से मची है खलबली

 पंचायत और निकाय चुनाव के लिए शासन-प्रशासन,राज्य निर्वाचन आयोग की अपनी-अपनी तैयारियां जोर पकड़ती जा रही हैं। उधर,राजनीतिक दल अपनी बिसात बिछाने में जुट गए हैं। इसके चलते जो निराश होकर घर बैठ गए थे वे भी दोबारा सक्रिय हो उठे हैं। चूंकि वर्तमान समय में आरक्षण-परिसीमन दोबारा होना है कि नहीं, मेयर इलेक्शन डायरेक्ट होना है या पार्षदों के माध्यम से आदि-आदि बिंदुओं पर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए उम्मीदवार असमंजस में नजर आ रहे हैं। वहीं निर्वाचन आयोग ने अतिशीघ्र अधिसूचना जारी करने की बात कह कर खलबली मचा दी है।

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