लखन-तरुण सेफ जोन में, पूर्व विस अध्यक्ष एनपी प्रजापति की सीट पर खतरा
भोपाल। प्रदेश में आज विधानसभा चुनाव हो जाएं तो क्या स्थिति रहेगी? पहली बार चुने विधायकों की लोकप्रियता का ग्राफ क्या है और किन सीटों पर पार्टी ताकत लगाकर चुनाव जीत सकती है? इस तरह के सवालों को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने खुद एक एजेंसी से सर्वे कराया हैै , जिसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान 95 विधायकों में 27 की सीट पर हार का खतरा है। कमजोर परफार्मेस वाले विधायकों को 15 माह पहले कराए गए सव्रे के मुताबिक अपने क्षेत्र में मेहनत करने की सलाह दी गई है। सव्रे रिपोर्ट में जबलपुर के दो पूर्व कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया और तरुण भनोत आज भी जीत सकने की स्थिति में है, वहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति की सीट खतरे में बताई गई है।
जहां 6-7 माह पहले प्रत्याशी तय होगा उनमें जबलपुर की केंट सीट
पार्टी सूत्रों के मुताबिक सर्वे में पता चला है कि 27 विधायकों की उनके क्षेत्र में लोकप्रियता का ग्राफ पिछले कुछ समय में गिरा है। इन सभी को क्षेत्र में सिक्र यता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि 36 विधायकों का परफॉर्मेंस ठीक है। इसमें 15 पूर्व मंत्री शामिल हैं। जिन सीटों पर चुनाव के 6-7 माह पहले प्रत्याशी तय करने का मशविरा दिया गया है उनमें जबलपुर शहर की केंट सीट शामिल है,वहीं शहरी क्षेत्र की उत्तर मध्य व ग्रामीण की बरगी सीट पर विधायकों का परमार्मेस संताषजनक बताया गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि 22 विधायक ऐसे हैं, जो अब भी जनता के बीच सक्रिय रहें तो मैदान मार सकते हैं। अभी चुनाव में करीब डेढ़ वर्ष हैं। तब तक इन विधायकों को स्थिति सुधारते हुए अपनी सीट बनाए रखने की पुख्ता तैयारी का मौका दिया जा रहा है। सभी सीटों पर हर तीन माह में सर्वे रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद फाइनल रिपोर्ट बनेगी, जो टिकट का पुख्ता आधार बनेगी।
पहली बार जीतने वालों में कांग्रेस के 51 और भाजपा के 33 विधायक
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सर्वाधिक विधायक पहली बार चुनाव जीते थे। इनमें से अधिकांश की कम सक्रियता को लेकर पार्टी चिंतित है। जबकि भाजपा ने इन हारी हुई सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। मौजूदा विधानसभा में 230 में से 84 सदस्य ऐसे हैं जो पहली बार विधायक बने। इसमें से 51 कांग्रेस व 33 बीजेपी के हैं। कमलनाथ की रिपोर्ट में बताया गया है कि गाडरवारा से विधायक सुनीता पटेल की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्हें और मेहनत की दरकार बताई गई है। अवैध रेत खनन का मुद्दा उन्होंने उठाया जरूर पर उसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया। ब्राह्मण मतदाता भी उनसे संतुष्ट नहीं हैं। तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र से संजय शर्मा की स्थिति सर्वे में ठीक सामने आई है पर उन्हें भी सक्रियता बढाने की जरूरत बताई गई है। लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले रामनिवास रावत (विजयपुर) पिछली बार हार गए थे, लेकिन क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण वे बेहतर स्थिति में हैं।
70 सीटों पर 6 महीने पहले उम्मीदवार तय करने की सिफारिश
सर्वे रिपोर्ट में ऐसी करीब 70 सीटों पर 6 महीने पहले उम्मीदवार तय करने की सिफारिश की गई हैं, जहां कांग्रेस वर्षों से नहीं जीती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि इन सीटों पर जीत हासिल करनी है तो वहां से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के पास मौका होना चाहिए। साथ ही यहां के लिए पार्टी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाए, जो लगातार उस क्षेत्र की वस्तुस्थिति से अवगत रहें। मुख्य रूप से रीवा, ग्वालियर ग्रामीण, गोविंदपुरा, मंदसौर, इंदौर-4, उज्जैन उत्तर, रतलाम शहर, होशंगाबाद, पिपरिया,खंडवा, जबलपुर केंट व बालाघाट सीट पर उम्मीदवार चुनाव से 6-7 महीने पहले तय किए जाने की सलाह दी गई है। (साभार: भास्कर)