52 जिला पंचायतों में 8 एससी, 14 एसटी 4 ओबीसी और 26 अनारक्षित सीटें, मेयर पद के लिए आरक्षण पूर्ववत
भोपाल। ओबीसी आरक्षण को लेकर कांग्रेस-भाजपा में श्रेय की जंग के बीच मंगलवार को प्रदेश की जिला पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए किए गए आरक्षण में ओबीसी को एक बार फिर झटका लगा है। 52 जिला पंचायतों में 8 एससी, 14 एसटी और सिर्फ 4 ओबीसी के खाते में आईं हैं। 2014-15 में ओबीसी की 13 सीटें थीं जो नई आरक्षण प्रक्रिया में घटकर सिर्फ 4 हो गईं हैं। 26 जिला पंचायत अनारक्षित वर्ग के खाते में गई हैं, जबलपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया है। मेयर पद के लिए आरक्षण पूर्ववत रहेगा। कांग्रेस ने फिर ओबीसी वर्ग को मिलने वाले आरक्षण पर सवाल उठाया है। भोपाल में इस बार सिर्फ महिला ही जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ सकेंगी। दरसअल, सुप्रीम कोर्ट ने 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा में रहते हुए अनुसूचित जाति-जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सीटें आरक्षित करने के आदेश दिए थे। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को 22 सीटें मिलीं हैं। पिछले चुनाव में भी ये इतनी ही थीं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के संचालक पंचायतराज आलोक कुमार सिंह ने पिछले चुनाव की आरक्षित सीटों को अलग निकालकर आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कराई। मटके में लाट निकालकर आरक्षण किया गया। अनुसूचित क्षेत्र (शेड्यूल एरिया)की जिला पंचायत झाबुआ, आलीराजपुर, मंडला, डिंडोरी और बड़वानी में अध्यक्ष पद को पहले ही अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया था। इसके बाद अन्य जिलों में से लाट निकालकर सीटें आरक्षित की गईं। सभी वर्गों में महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं।
नपा: 28 सीटें ओबीसी के लिए, होशंगाबाद, छतरपुर ओबीसी महिला और भिंड एससी महिला के लिए
मध्यप्रदेश में 99 नगर पालिकाएं हैं। इनमें से 28 नगर पालिकाएं ओबीसी के लिए आरक्षित की गई है। सबसे पहले आरक्षण की शुरूआत अनुसूचित जाति के लिए किया गया है। इसके लिए 15 पद आरक्षित किए गए हैं, इनमें से 8 पद महिलाओं के लिए हैं। वहीं एसटी के लिए 6 सीटें आरक्षित, इनमें तीन महिला के लिए रिजर्व की गई हैं। 50 सीटों का रिजर्वेशन अनारक्षित के लिए हुआ है। इनमें से 25 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई है। नगर पालिका नागदा (उज्जैन) अजा महिला सीट हो गई है। बीना इटावा वापस महिला के लिए आरक्षित हुई है। यह पिछली बार भी महिला सीट थी। भोपाल के रविंद्र भवन के ऑडिटोरियम में नगर पालिका और नगर परिषदों का अध्यक्ष के लिए रिजर्वेशन की प्रक्रिया दोपहर 3 बजे से शुरू हुई। कांग्रेस ने ओबीसी के आरक्षण को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कांग्रेसने 27} आरक्षण देने की बात कही। इस पर कुछ देर के लए प्रोसेस रूकी रही।
ये नपा अजा के लिए रिजर्व
.मकरोनिया बुजुर्ग सागर, खुरई सागर (महिला), दमुआ (महिला), डबरा, गोहद (महिला), सारणी, आमला, चंदेरी, बीना इटावा (महिला), लहार (महिला), गोटेगांव (महिला), महाराजपुर, नागदा (महिला), भिंड (महिला)।
एसटी के लिए 6 सीटें आरक्षित
एसटी के लिए 6 सीटें आरक्षित की गई है, इसमें से 3 सीटें महिला के लिए रिजर्व रखी गई हैं। मलाजखंड, झाबुआ, अलीराजपुर (महिला), पाली, बड़वानी (महिला), बिजूरी (महिला)।
42 नगर परिषद आरक्षित इनमें 21 महिलाओं के लिए
नगर परिषद के लिए 42 नगर परिषदें आरक्षित की गई, इनमें 21 महिलाओं के लिए है। मध्यप्रदेश में 298 नगर परिषद हैं। इनमें 263 ऐसी हैं, जो पुरानी हैं। इनमें पहले चुनाव हो चुके हैं। 35 नगरपरिषदें नवगठित की गईं हैं जिनमें पहली बार चुनाव होंगे नई गठित परिषदों के लिए आरक्षण की अलग से प्रक्रिया होगी। एससी के लिए 16 नगर परिषद अध्यक्ष पद रिजर्व किए गए हैं। जबकि एसटी के लिए 25 पद रिजर्व किए गए हैं।
