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‘पीके’ का सोनिया के सामने तो जबलपुर के ‘पीडी’ का जमीनी कार्यकर्ताओं के सामने प्रेजेंटेशन

कब तक देखें पराजय का तमाशा, बड़े नेता क्यों नहीं देखते कांग्रेसियों की हताशा 

जबलपुर। सिर्फ दो राज्य और गिनती के बचे सांसदों के साथ कांग्रेस पार्टी लगातार पराजय के बाद आत्ममंथन के दौर में है। चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर यानि पीके द्वारा दिल्ली में आलाकमान के सामने 2024 के आमचुनाव की रणनीति से संबंधित दिया गया प्रेजेंटेशन जबलपुर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रेम दुबे यानि पीडी को रास नहीं आया। पीडी ने फेसबुक पर कार्यकर्ताओं के नाम संबोधित प्रेजेंटेशन में जो बातें कहीं उसकी चर्चा सबदूर हो रही है। ऐसे कार्यकर्ता जो यह कहते नहीं थकते कि कब तक पराजय का तमाशा देखेंगे और कब पार्टी के बड़े नेता मैदानी कार्यकर्ताओं की हताशा को समङोंगे, पीडी के प्रेजेंटेशन को मान रहे हैं कि जैसे हमारी भावनाओं को ही शब्द मिल गए हैं। प्रेम दुबे ने साफ कहा कि वो जमाना था जब प्रधानमंत्री पद संभालने वाले राजीव गांधी भी कार्यकर्ता से सीधे मुलाकात करते थे, उनकी बात सुनते थे और अपनी बात कहते थे, लेकिन अब प्राइवेट कंपनी चलाने वाले और इससे पैसा कमाने वाले प्रशांत किशोर की बात सुनी जा रही है और अब वे ही बताएंगे कि चुनाव कैसे लड़ना है? अब जबकि पीके ने कांग्रेस में शामिल होने से इंकार कर दिया है, प्रेम दुबे की बात प्रासंगिक हो गई है। 

सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पीडी का शब्दश: प्रेजेंटेशन

 लगातार पराजय से व्यथित जमीनी कार्यकर्ताओं की वेदना को प्रेम दुबे ने भावनात्मक रूप देते हुए कहा कि कांग्रेस आलाकमान पराजय से उबरना चाह रहा है तो पार्टी का जमीनी कार्यकर्ता भी पुराने दिन देखने के सपने संजो रहा है। फेसबुक प्रेजेंटेशन में पीडी की उस बात को कार्यकर्ता सोचने मजबूर हो गया कि प्रोफेशनल लोग जो पैसों के लिए काम करते हैं, उनकी बजाय आम कार्यकर्ताओं-नेताओं पर भरोसा आखिर क्यों न किया जाए। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रेम दुबे ने कहा कि पीके जो चुनाव संचालन करने वाले एक प्राइवेट इंटरप्रेनर हैं, और व्यवसाय से पैसा कमाते हैं कभी भाजपा में थे, कभी जदयू में तो कभी ममता बैनर्जी की टीएमसी के साथ थे। यूपी में इन्होंने कांग्रेस के लिए भी काम किया, वहां इनके अभियान की क्या गत हुई, वो देश ने देखा। मुङो प्रशांत किशोर जी के दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जी के सामने प्रेजेंटेशन देने से वेदना हुई। भारत के जाने-पहचाने तमाम वे नेता जिन्होने अपनी पूरी जवानी कांग्रेस को दे दी, वो सब वहां बैठे थे। सभी ने उन्हें शांतिपूर्वक सुना। अच्छा है, सलाह लेना बुरा नहीं है। आज स्ट्रैटेजी की बात की जाती है। मौके ढूंढने की बात कही जाती है। मगर दुख होता है जब कांगेस के लाखों लोग जो बहुत ज्ञान-अनुभव रखते हैं, संघर्ष करते हैं, अपना पैसा लगाकर काम करते हैं, उन्हें मौका नहीं मिलता अपने नेताओं से मिलने का। मैं राजीव गांधी जी से खूब मिला करता था। यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष था। वे 15-15,20-20 मिनट देते थे। हर शुक्रवार का दिन उनके पीएम कार्यकाल में निश्चित रहता था कि वो कांग्रेसजनों से मिलेंगे। मुङो कई बार सांसद अजय मुश्रन जी ले जाते थे। कई बार बातचीत तर्क-वितर्क होते थे, वो हम जैसे कार्यकर्ता की बात सुनते थे। आज कांग्रेस के सामने संकट ये है कि कांग्रेस में अपनापन हम खोते जा रहे हैं। परिवार जैसा माहौल नहीं है, हम अपनी वेदना किसी के सामने रख नहीं सकते। देश के लाखों लोग चाहते हैं कि कांग्रेस को मजबूत करें। उसपे काम करना चाहते हैं, आज भी बहुत से लोग सत्ता के लिए नहीं काम करते, वो इसलिए करते हैं कि नेहरू ,गांधी और उसके सिद्धांतों और समर्पण की भावना के कारण। कांग्रेस सिर्फ चुनाव जीतने के लिए नहीं राष्ट्र के निर्माण के लिए काम करती आई है। आज प्रशांत किशोर जी जैसे लोग हमारे बड़े नेताओं को जब ज्ञान देते हैं, तब दुख होता है। हमारे नेताओं के दरवाजे बंद हैं, उनसे मुलाकात करना मुश्किल है। निश्चित ही वे व्यस्त हैं,लेकिन वे यदि आम कार्यकर्ताओं से मिलें,पोलिंग बूथ वर्करों से मिलें। प्रदेश शहर गांव में आकर रुकें, संवाद करें तो कुछ उम्मीद की जा सकती है। हर भारतीय, हर कांग्रेसी, हर पार्टी का चहेता आगे आए और अपनी बात बहुत अच्छे ढंग से रखे। वो बताऐ कि नेता आप ही हैं, पर आप दरवाजा खोलें, मन खोलें एक परिवार के जैसे सबको ट्रीट करें, सबको जोड़ें ,सबको लेके चलें सबकी बात को समङों। केवल कुछ लोगों से जुड़े रहने, घिरे रहने से परेशानी होगी। जनांदोलन करें, जनता की मांग को उठाएं तो भी हम अच्छे विपक्ष का रोल अदा कर सकते हैं। एक अचछे विपक्ष के रूप में यदि हम स्थापित होते हैं, तो क्या लोगों को समझा नहीं सकते कि कि हम अच्छा काम विपक्ष में रहकर भी कर सकते हैं। आज प्रशांत किशोर जैसे लोगों के दांव पेच ंमें उनकी बातों में फंसकर बंद कमरे में बैठकर नीति बनाकर इस देश पर शासन तो कर सकते हैं, पर जनता का दिल नहीं जीत सकते। हमें लोगों के दिल जीतने का काम करना है। आप सब मिल कर मेरी आवाज पहुंचाने का प्रयास करें। हम सोनिया जी से राहुल जी से प्रियंका जी से तमाम वरिष्ठ नेताअें से आग्रह करते हैं, कि आप सब सोचें कि आप तपस्या वाले परिवार के लोग हैं, आपके परिवार ने तपस्या की है, बलिदान दिया है इस देश के लिए। इसीलिए हम आपके साथ रहे हैं। लाखों लोगों का कांग्रेस परिवार आज भी आपके साथ है और बना रहेगा, यह मेरा विश्वास है।

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