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सल्फास से खतरे में पड़ी जिंदगी, बड़ेरिया मेट्रो प्राइम में चिकित्सों ने बचा ली

महाकोशल में एक्मो मशीन का पहला सफल प्रयोग 

 जबलपुर। सल्फास खाने के बाद मरीज का बचना मुश्किल है,लेकिन बड़ेरिया मेट्रोप्राइम मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में इंस्टाल की गई एक्मो मशीन से सल्फास खाए हुए व्यक्ति की जान चिकित्सकों की मेहनत व अनुभव से बचाई जा सकी। इस केस में ऐसी स्थिति भी आई जब मरीज के हार्ट ने काम करना बंद कर दिया था, तब एक्मो मशीन से मरीज की जान बचा ली गई। एक्मो मशीन से उपचार की सुविधा महाकोशल-विंध्य में केवल बड़ेरिया मेट्रोप्राइम हॉस्पिटल जबलपुर में उपलब्ध है। उक्त जानकारी हॉस्पिटल के डायरेक्टर राजीव बड़ेरिया ने प्रेस कांफ्रेस में दी।

 3 दिन हार्ट ने नहीं किया काम, फिर भी बची मरीज की जान

उन्होने बताया कि सल्फास का सेवन किए हुए गाडरवारा निवासी एक व्यक्ति को बड़ेरिया मेट्रोप्राइम मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में गंभीर हालत में भर्ती किया गया। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए हास्पिटल में मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र सिंह राजपूत, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ दिलीप तिवारी, छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविन्द कुमार जैन, इंटेसिविस्ट डॉ. सुनील जैन की टीम ने गहन विचार करने के बाद मरीज के परिजन से अनुमति लेते हुए मरीज को एक्मो मशीन लगाने का निर्णय लिया। डॉ. जैन ने बताया कि एक वक्त ऐसा भी आया जब मरीज का हार्ट बिल्कुल काम नहीं कर रहा था। ऐसे रिदम में मरीज 24 घंटे रहा, जिसमें किसी भी मरीज का जिंदा रहना मुश्किल होता है लेकिन एक्मो के कारण मरीज सरवाइव कर सका। क्योंकि एक्मो मशीन से हार्ट और लंग्स को बायपास कर दिया था और मशीन बाहर से हार्ट का काम कर रही थी। इसका खुद का अक्सीनेटर होने के कारण यह कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त शुद्ध आक्सीजन पंप कर रही थी। धीरे धीरे मरीज के हार्ट ने काम करना शुरू किया और 6 दिन में उसका हार्ट 45 प्रतिशत काम करने लगा। शरीर के बाकी अंग भी काम करने लगे। मरीज पूर्ण स्वस्थ होकर घर चला गया है।

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