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मौजूदा दौर में शून्य बजट प्राकृतिक खेती किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं- स्वास्थ्य मंत्री डॉ चौधरी रायसेन कृषि उपज मण्डी में “शून्य बजट प्राकृतिक कृषि पद्धति“ पर आधारित कार्यशाला सम्पन्न






मौजूदा दौर में शून्य बजट प्राकृतिक खेती किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं- स्वास्थ्य मंत्री डॉ चौधरी
रायसेन कृषि उपज मण्डी में “शून्य बजट प्राकृतिक कृषि पद्धति“ पर आधारित कार्यशाला सम्पन्न


रायसेन,- स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी द्वारा रायसेन कृषि उपज मंडी में “शून्य बजट प्राकृतिक कृषि पद्धति“ पर आधारित कार्यशाला का कन्यापूजन और दीप प्रज्जवलन कर शुभारंभ किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ चौधरी ने कहा कि खेती के मौजूदा दौर में शून्य बजट प्राकृतिक खेती किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस तरह की खेती से कम लागत में अधिक पैदावार और गुणवतत युक्त उत्पाद प्राप्त होता है, जिसका बाजार में भी किसानों को अच्छा भाव मिलता है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ चौधरी ने कहा कि हमारे देश में पौराणिक काल से ही जैविक खेती की पद्धति किसानों द्वारा अपनाई जा रही है। हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। शून्य बजट प्राकृतिक खेती में प्राकृतिक चीजों का उपयोग होता है जिसका मिट्टी एवं मानव स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ चौधरी ने कहा कि उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों एवं सलाहकारों के मार्गदर्शन में जैविक खेती, शून्य बजट प्राकृतिक खेती पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जिससे किसानों द्वारा जैविक खेती की नवीन तकनीक अपनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें।
कार्यक्रम में भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, गुजरात के राज्यपाल आचार्य श्री देवव्रत और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला का लाईव प्रसारण भी देखा गया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री अरविन्द कुमार दुबे, पुलिस अधीक्षक श्री विकास कुमार शहवाल, उप संचालक कृषि श्री एनपी सुमन सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और किसान उपस्थित थे।

किसानों को जैविक खेती और शून्य बजट प्राकृतिक खेती की दी गई जानकारी
 
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ स्वप्निल दुबे द्वारा किसानों को जैविक खेती और शून्य बजट प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में रासायनिक उर्वरकों और दवाओं का अधिक उपयोग करने के फलस्वरूप मिट्टी का स्वास्थ्य की उत्पादन क्षमता कम हो रही है तथा मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कृषि वैज्ञानिक डॉ दुबे ने कहा कि शून्य बजट प्राकृतिक खेती में किसान स्वयं से बनाई खाद, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद, नाडेप एवं जैविक कीटनाशकों का फसलों में उपयोग करते हैं। जिससे खेती की लागत कम और मुनाफा अच्छा प्राप्त होता है। खेती में रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैविक कीटनाशक जैसे गौमूत्र, नीम का तेल, छाछ, छतूरा, वेसरम का काढ़ा आदि का उपयोग कर कीटों पर नियंत्रण किया जा सकता है

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