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मोदी-योगी के झंका-मंका के बीच क्यों फसी 32 साल से भाजपा के कब्जे वाली वाराणसी की सीट

यूपी चुनाव के अंतिम दौर में सपा के ब्राम्हण कार्ड की कड़ी चुनौती का समीकरण 

लखनऊ। यूपी चुनाव के सातवें और अंतिम चरण की वोटिंग के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे से उत्साहित भाजपा के लिए शहर की दक्षिणी विधानसभा सीट पर सपा की कड़ी चुनौती है। बीते 32 सालों से भाजपा के कब्जे वाली इस सीट पर 2017 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. राजेश मिश्र इस बार कैंट विधानसभा से प्रत्याशी हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि सपा से किशन दीक्षित की उम्मीदवारी घोषित होने की भनक लगते ही डॉ. राजेश मिश्र ने पार्टी नेतृत्व से बात कर अपना विधानसभा क्षेत्र बदलवा लिया। वहीं भाजपा के नीलकंठ तिवारी के सामने अखिलेश यादव ने महामृत्युंजय महादेव मंदिर के महंत कामेश्वर दीक्षित उर्फ किशन महाराज को उतार कर भाजपा की हिन्दूवादी रणनीति का जवाब दिया है।

 भाजपा प्रत्याशी नीलकंठ तिवारी को वीडियो जारी कर माफी मांगना पड़ी

काशी विश्वनाथ मंदिर की वजह से यूपी की महत्वपूर्ण मानी जाने वाली शहर दक्षिण विधानसभा सीट पर श्यामदेव राय चौधरी 1989 से लेकर 2012 तक 7 बार भाजपा से विधायक चुने गए। पिछले 2017 के चुनाव में चौधरी को अचानक बदलकर नीलकंठ तिवारी को भाजपा ने मैदान में उतारा हालांकि वे चुनाव जीत गए और योगी सरकार में पर्यटन मंत्री बने, लेकिन स्थानीय लोगों से उनकी दूरी ने खासा विरोध पैदा कर दिया। यहां बीते साढ़े चार साल में नीलकंठ तिवारी की निष्क्रियता से जनता में नाराजगी भांपते हुए उन्होने तीन दिन पहले वीडियो जारी कर जनता से माफी मांगी। यह वीडियो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना है और कहा जा रहा है कि उनके समर्थकों ने इसके लिए दबाव बनाया था। तिवारी ने वीडियो में कहा कि व्यस्तता के कारण मैं जनता से दूर रहा, अब माफी मांगता हूं। 

 सपा को ब्राम्हण, यादव, मुस्लिम व बंगाली वोटरों पर भरोसा

शहर दक्षिणी विधानसभा में मतदाताओं की संख्या 3 लाख 23 हजार 470 है। अनुमान के अनुसार, इन मतदाताओं में सबसे ज्यादा संख्या ब्राह्मणों की है। इसके अलावा, मुसलमान, कायस्थ, बंगाली, वैश्य, यादव मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं। वहीं पीएम मोदी के वाराणसी दौरे से एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी की सभा आयोजित कर भाजपा की मुश्किलें बढ़ाई गई। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद यहां के व्यापारी इस बात से नाराज हैं कि फूल माला लेने वाले सीधे अंदर से ऑनलाइन ले लेते हैं, वहीं 3-3 सौ रुपए लेकर दर्शन कराने की परंपरा से भी श्रद्धालु नाराज हैं। इस सीट पर साधु-संतों की नाराजी झलकने से भी भाजपा की परेशानी बढ़ी है।

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