Type Here to Get Search Results !

पनागर पहुंचा बुल्डोजर, 20 करोड़ कीमती 34 दुकानें जमींदोज, दुकानदार बोले-हमने खरीदी थीं

मिश्र मार्केट का निर्माण करने वाले ने पहले ही किया था फर्जीवाड़ा 

जबलपुर। रसूखदार भू माफिया पर कार्रवाई करते प्रशास का बुल्डोजर आज पनागर पहुंच गया। यहां पनागर जनपद से पड़ाव तक बनी 20 करोड़ रुपए कीमती 34 दुकानों को जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान अतिक्रमण अमले के सामने दुकान संचालक गिड़गिड़ाते रहे, कि उन्होंने कल्लू राम मिश्र के परिवार से दुकानें खरीदी थीं। दुकानों की रजिस्ट्री या लिखा-पढ़ी के समय किसी भी प्रकार की रोक नहीं थी। अब दुकानों को एकाएक अवैध रूप से निर्मित होना बताकर तोड़ा जा रहा है। मौके पर मौजूद एसडीएम-तहसीलदार ने दुकान संचालकों को समझाइश देते हुए बताया, कि यह भूमि शासकीय है, पुराने रिकॉर्ड में भी पीडब्ल्यूडी के आधीन है। न्यायालय में कई सालों तक कब्जाधारी और प्रशासन के बीच प्रकरण भी चला है। पनागर के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी अतिक्रमण कार्रवाई होना बताया जा रहा है।

 पुराने एनएच पर 42 साल पहले बनी थी दुकानें

 पनागर पुराने बस स्टेण्ड के समीप मिश्र मार्केट के नाम से प्रसिद्ध मार्केट कुछ घंटे के बाद नहीं रहेगा। जानकारी के मुताबिक वर्ष 1980 में पनागर निवासी कालूराम मिश्र (अब फौत) ने पुराने नेशलन हाईवे के किनारे 34 दुकानों का निर्माण किया था। करीब 42 साल पहले बनी इन दुकानों को मिश्र और उनके परिवार द्वारा बेचने का कार्य शुरू किया गया था। मार्केट की करीब 32 दुकानें को अन्य लोगों को बेचा गया, शेष 3 दुकाने किरायानामा में संचालित हो रही थीं। नेशनल हाइवे किनारे बने इस मार्केट की जमीन पर दावा किया गया था, उक्त जमीन केंद्र सरकार की है और पीडब्ल्यूडी के अधीपत्य में है। कालूराम मिश्र ने उक्त भूमि का अपना बताया, जिसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंचा था। दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई के बीच 2 बार विवाद की स्थिति बनी। एसडीएम पीके सेन गुप्ता, तहसीदार सहित पनागर थाने का पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।

 दुकानदारों के सामने परिवार को पालने की समस्या

सुबह करीब 8 बजे से मार्केट तोड़ने की कार्रवाई सुनिश्चित थी। दुकान संचालक मौके पर पहुंचे अधिकारियों के सामने रोते-बिलखते हुए कहते रहे कि साहब, हमने तो दुकानें खरीदी थी। दुकान बिक्री के समय यह नहीं बताया गया था कि दुकानों का निर्माण शासकीय भूमि में है। दुकानदारों का कहना था कि 2 साल से कोरोना काल की मार ङोलेने के बाद कारोबार पटरी में लाने का प्रयास कर रहे थे और इसी बीच दुकानें तोड़ी जा रही है। दुकान में जिंदगी भर की जमा पूंजी लगा दी, अब परिवार को कैसे पालेंगे! 42 साल पहले हुए दुकानों के निर्माण को लेकर मौके पर लोगों का कहना था, कि तब भूमि पर कब्जा कर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा था, तब तत्कालीन अधिकारियों ने निर्माण को नहीं रोका। पनागर में चर्चा है, कि मिश्र और अधिकारियों की मिलीभगत से ही दुकानों का निर्माण हुआ था।

Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.