विधानसभा के बजट सत्र में उठेगा मामला, राजधानी में 13 को जुटेंगे कर्मचारी
भोपाल। राज्य सरकार के समक्ष आने वाले समय में कर्मचारियों की पुरीन पेंशन की टेंशन शुरू हो गई है। दरअसल,पेंशन स्कीम फिर से लागू करने शासकीय कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है और इसके लिए 13 मार्च को राजधानी में बड़े प्रदर्शन की तैयारी है। राजस्थान की गहलोत सरकार द्वारा पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने के एलान के बाद एमपी में कांग्रेस ने यह मुद्दा लपक लिया और बजट सत्र में विपक्ष राज्य की शिवराज सरकार को घेरने तैयारी कर रही है। बताया जाता है कि इस विषय पर कांग्रेस विधायक अशासकीय संकल्प लाने वाले हैं।
क्या है विरोध में तर्क और कब से की गई है बंद
पेंशन मामले में मोर्चा खोलने वाले कर्मचारी संगठनों की मांग है कि 1 जनवरी 2005 या इसके बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम लागू हो, नई पेंशन स्कीम ठीक नहीं है। रिटायरमेंट के बाद कई कर्मचारियों को हर महीने 800 से डेढ़ हजार रु पए ही पेंशन के रूप में मिल रहे हैं। मध्यप्रदेश में 1 जनवरी 2005 के बाद विभिन्न विभागों में नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के लिए सरकार ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बंद कर दी थी। इसकी जगह नई पेंशन स्कीम लागू की गई थी। इसी स्कीम का कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। पुरानी पेंशन बहाली संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौहान ने बताया कि नई पेंशन नीति के दुष्परिणाम अब सामने आ रहे हैं। कुछ कर्मचारी जब रिटायर हुए तो उनकी पेंशन 800 से 1500 रु पए प्रतिमाह ही बनी। इतने कम रु पयों में कर्मचारी या उनके परजिनों का भरण-पोषण संभव नहीं है। पुरानी पेंशन नीति में सैलरी की लगभग आधी राशि पेंशन के रूप में मिलती थी। नई नीति में पेंशन बढ़ने के लिए कुछ भी नहीं है।
कांग्रेस ने उद्वेलित कर्मचारियों का साथ देने रणनीति बनाई
कर्मचारियों की पेंशन बहाली का मुद्दा विधानसभा में उठाने की तैयारी में जुटी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर उद्वेलित शासकीय कर्मचारियों का साथ देने की रणनीति बनाई है। विधानसभा में आगामी बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक अशासकीय संकल्प लाने तथा शून्यकाल में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाएंगे। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने विधायकों से इस संबंध में तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।