श्योपुर, 14 फरवरी 2022
मातृ-पितृ पूजन दिवस आज पूरी तरह से प्रेरणा वृद्धाश्रम के बुजुर्गो के नाम रहा। दिनभर चली गतिविधियों जहां सुबह कलेक्टर श्री शिवम वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने वृद्धाश्रम पहुंचकर उनका सम्मान कर आर्शीवाद लिया। इसके उपरांत उनके साथ सहभोज कर समय बिताया। भोजन के बाद आयोजित स्वास्थ्य शिविर में चिकित्सकों की टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक होने पर उपचार किया गया। दोपहर में बुजुर्गो को कलेक्टर श्री शिवम वर्मा के निर्देश पर सामाजिक न्याय विभाग द्वारा पर्यटन के लिए श्योपुर के ऐतिहासिक किले ले जाया गया। जहां उन्होने प्राचीन धरोहर के अलावा सहरिया संग्राहलय का अवलोकन किया, वही डोब कुडं से लाई गई प्राचीन मूर्तियां भी देखी। वृद्धाश्रम के बुजुर्गो ने आनन्द और खुशनुमा माहोल में अपना दिन व्यतीत किया।
उल्लेखनीय है कि सुबह वृद्धाश्रम पहुंचे कलेक्टर श्री शिवम वर्मा द्वारा बातचीत के के दौरान कुछ बुजुर्गो द्वारा बाहर घूमने की इच्छा जताये जाने पर उन्होने बुजुर्गो को किले में घूमाने के निर्देश दिये थे। जिस पर सभी बुजुर्गो को दोपहर के समय किले का भ्रमण कराया गया। सभी बुजुर्गो को एक बस के माध्यम से पर्यटन के लिए ले जाया गया। उन्होने अधिकारियों को निर्देश दिये है कि वृद्धाश्रम के बुजुर्गो को समय-समय पर आस-पास के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर भ्रमण के लिए ले जाया जाये।
कलेक्टर बेटे ने हमारी इच्छा तत्काल पूरी की
वृद्धाश्रम में वर्षो से रह रही श्रीमती शांति बाई ने किले के भ्रमण के दौरान बातचीत में बताया कि कलेक्टर बेटे ने हमारी इच्छा तत्काल ही पूरी कर दी। सुबह जब कलेक्टर आये थे तो हमने बाहर जाने के लिए अपनी इच्छा बताई थी। उन्होने कहा कि बुजुर्गो का मान सम्मान रखने वाले हमारे जिले के कलेक्टर बहुत ही सहद्य और संवेदनशील है। उनकी वजह से आज हम किले में घूमने के लिए आये और सीप नदी के प्राकृतिक दृश्यों का आंनन्द लिया। साथ ही गणेश मंदिर के भगवान के दर्शन किये।
गौड राजाओं का इतिहास जानने को मिला
बुजुर्गो के दल में आये श्री बाबा बंजरग कहते है कि आज वह बहुत प्रसन्न है। भगवान के दर्शन के साथ-साथ एतिहासिक किले के बारें मेंं जानने को मिला है। यहां लगाये गये बोर्ड के माध्यम से गौड राजाओं के इतिहास के बारें में जानकारी मिली है।
सहरिया संस्कृति से रूबरू होने का अवसर
बुजुर्ग साथी श्री गोपाल शर्मा ने बताया कि पर्यटन स्थल पर आना एक सुखद एहसास है। सहरिया संग्राहलय के माध्यम से श्योपुर जिले की सहरिया संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिला है।
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