जबलपुर। जगत जननी आदिशक्ति जगदंबा के रूप में पूजित आदिशक्ति मां भवानी की पूजा-अर्चना और उपासना का विशेष पर्व गुप्त नवरात्र आज से प्रारंभ हो गए हैं। वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं। इनमें दो प्रकट और दो गुप्त कही जाती हैं। प्रकट नवरात्र में शारदेय और वासंतेय हैं, जबकि गुप्त नवरात्र में अन्य दो। इनमें से एक आज से प्रारंभ हो रही है। मातृशक्ति की आराधना के ये नौ दिन गुप्त माने गए हैं। इनमें की जाने वाली साधना विशेष फलदायी मानी गई है। यही कारण है कि देवी मंदिरों में जगदंबा की आराधना की आज से धूम रहेगी।
होता है सपर्यक्रम पूजन
गुप्त नवरात्र में सपर्यक्रम पूजन का विशेष महत्व है। सपर्यक्रम पूजन में आवरण पूजन होती है। सिविक सेंटर स्थित बगलामुखी मंदिर में नौ दिनों तक विशेष आराधना होती है। यहां दूर-दूर से भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आते हैं। इसके अलावा बड़ी खेरमाई, छोटी खेरमाई, बूढ़ी खेरमाई, मानव भवन मंदिर, काली मंदिर सदर सहित अन्य देवी मंदिरों में आज से नौ दिनों तक विशेष आराधन होगा।
व्यक्तिगत स्तर पर भी पूजन
गुप्त नवरात्रि पर मां भगवती के भक्त व्यक्तिगत स्तर पर भी मैया का पूजन-हवन सहित अन्य अनुष्ठान करते हैं। प्रकट नवरात्र की तरह इन दोनों गुप्त नवरात्र में भी कई देवी आराधक निजर्ल या यथा स्थिति व्रत रखते हैं। नौ दिनों तक जप, पूजन, पारायण, ज्योति प्रज्जवलन, दर्शन सहित अन्य विधियों से मां का पूजन अर्चन करते हैं। इन गुप्त दिनों में गुप्त पूजा का विधान है। साधक इस दौरान गुप्त आराधना करते हैं।
ब्रम्हचारी चैतन्यानंद जी की 101 वीं नवरात्र
बगलामुखी मठ के ब्रम्हचारी चैतन्यानंद जी महाराज मां बगलामुखी के भक्त हैं। उनके सन्यास जीवन की ये 101वीं नवरात्रि है, इस कारण वे विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मां जगदंबा की श्रीविद्या के 9 आवरण होते हैं, जबकि जगदंबा मां बगलामुखी के आठ आवरण ही माने गए हैं। मंदिर में पूरे 9 दिन आठ आवरणों की पूजन होगी। दिन में मां का सेवंती, गुलाब, चमेली, हल्दी, किसमिस से अर्चन होगा तो रात्रि के समय सपर्यक्रम विधि से विशेष पूजन होगा। उन्होंने सभी भक्तों से दर्शन लाभ लेने की अपील की है।