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जबलपुर में गोबर-धन प्लांट की असीम संभावना, फिर उपेक्षा क्यों ?

मुख्यमंत्री को नागरिक उपभोक्ता मंच ने लिखा पत्र 

सरकारी रिपोर्ट में जबलपुर में 450 से ज्यादा डेयरियां और 20 हजार से अधिक भैंस 

जबलपुर। राज्य सरकार की रिपोर्ट में शामिल है कि जबलपुर में 450 से अधिक डेयरियां और 20 हजार से अधिक भैंस हैं, फिर गोबर-धन प्लांट की स्थापना में महाकोशल को क्यों उपेक्षित किया गया। यह सवाल उठाते हुए नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। कहा गया कि शहर के अलावा जिले के गांव-गांव में दूध का उत्पादन हो रहा है और यहां बड़ी संख्या में भैंसें पल रही हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि एक भैंस प्रतिदिन 15 से 20 किलो तक गोबर देती है। इसलिए यहां गोबर काफी मात्र में उपलब्ध है। इसलिए यहां पर गोबर का आयात न करते हुए बायोगैस और कम्पोस्ट खाद इत्यादि आसानी से उत्पादित की जा सकती है। जबलपुर क्षेत्र में गोबर से 90 प्रतिशत मीथेन वाली सीएनजी का उत्पादन भी आसानी से हो सकता है क्योंकि भारी मात्र में मीथेन गैस का उत्पादन यहां पर गोबर से हो रहा है। जबलपुर में बायो मिथेनाईजेशन प्लांट लगाने से उत्पादन खर्च में कमी आएगी। इंदौर में यह स्थिति नहीं है। इंदौर में गोबर आदि सभी सामग्री आयात करना पड़ेगी इससे इंदौर में उत्पादन लागत अधिक हो जाएगी। मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव आदि ने आरोप लगाया कि गोबरधन प्लांट लगाने के पहले राज्य सरकार द्वारा किए गए सव्रे में जबलपुर को शामिल ही नहीं किया गया। इसी से पता चल जाता है कि राज्य सरकार जबलपुर की लगातार उपेक्षा कर रही है।

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