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जबलपुर एसपी रहे अमित सिंह की लव स्टोरी, कॉलेज में प्यार, पर इजहार न कर सके, दोस्त ने मिलवा दिया

आईपीएस अफसर की लाइफ में आया फिल्म जैसा लव-ड्रामा-सस्पेंस और इमोशन 

जबलपुर। एक बेहतरीन आईपीएस अफसर और जबलपुर में लोकप्रिय एसपी रहे अमित सिंह की जिंदगी में आई लव स्टोरी किसी फिल्मी लवस्टोरी से कम नहीं है। जबलपुर में कानून व्यवस्था की बहाली के लिए ठंड में संवेदनशील इलाके गोहलपुर में तम्बू लगाकर रात बिताने का रिकार्ड बनाने वाले अमित सिंह और पत्नी प्रज्ञा सिंह की लव स्टोरी में लव-ड्रामा-सस्पेंस और इमोशन भी है। अमित सिंह बताते हैं कि दोनों साथ में पढ़े, कॉलेज लाइफ में एक-दूसरे से प्रेम किया, लेकिन इजहार न कर सके, दिल की बात दिल में रह गई। पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों के रास्ते अलग-अलग हो गए। फिर एक दोस्त के मैसेज ने दोनों को मिलवा दिया। 

अमित सिंह की जुबानी, उनकी लव स्टोरी 

 जिंदगी में आए इस पल की शुरु आत होती है इलाहाबाद यूनिविर्सटी से। हम एक साथ पढ़े। फिर भी एक-दूसरे से प्यार का इजहार नहीं कर पाए। उस समय मैं सीनियर रिसर्च फेलोशिप और प्रज्ञा एमए कर रही थी। कोर्स खत्म होने के बाद हम दोनों अपने-अपने रास्ते चले गए। दरअसल,2006 में इलाहाबाद (प्रयागराज) यूनिविर्सटी में ही मेरी प्रज्ञा से पहचान हुई। बातचीत हुई। हम दोनों ने एक-दूसरे के मोबाइल नंबर भी लिए, लेकिन एक-दूसरे को अपनी फीलिंग नहीं बता पाए। मैं यूपीएससी की तैयारी करने में लग गया। दोस्तों को ये बात पता थी कि मैं प्रज्ञा को पसंद करता हूं। एक दिन मेरे दोस्त ने प्रज्ञा को मेरे फोन से प्रपोज कर दिया। फिर मैसेज डिलीट कर दिया। तब मुङो इस बारे में कुछ पता नहीं था। रात करीब 2 बजे एक लडकी का फोन आया। उसने दोस्ती करने की बात कही। मेरा अगले दिन पेपर था। मैंने मना कर दिया। बाद में पता चला कि ये फोन प्रज्ञा ने ही अपनी सहेली से करवाया था। दूसरे दिन प्रज्ञा ने मुङो फोन किया। बस फिर, हमने एक-दूसरे से प्यार का इजहार कर दिया। 

पिता का डर इतना कि चिट्ठी में सब लिख देता था

मेरी पिताजी से कभी सीधे बात नहीं होती थी। यह उनके लिए डर और सम्मान था कि कुछ भी कहना होता था तो घर (प्रतापगढ, यूपी) चिट्ठी भेज देता। कई बार ऐसा हुआ कि पिताजी जब भी इलाहाबाद आए, मैं उन्हें कमरे में नहीं मिलता। तब वे मेरे लिए चिट्ठी छोड़ जाते थे कि, पढाई करते हो या घूमते रहते हो। ऐसे में परिवार को प्रज्ञा के बारे में बताना और शादी के लिए राजी कराना किसी जंग जीतने से कम नहीं था। 4 मई 2009 में यूपीएससी का रजिल्ट आया, तो घर पर शादी की बातें होने लगी। मैंने स्टूडियो जाकर प्रज्ञा का फोटो खिंचवाया और हिम्मत कर उसे घर पर भेज दिया। मैंने कहा कि मुङो इसी लडकी से शादी करनी है। अब कोई और रिश्ता नहीं देखना। परिजन राजी नहीं थे, लेकिन पीछे हटने का सवाल ही नहीं था। गलती की थी इसलिए अपनी गलती मानी और परिवार को मनाया। 2011 में परजिनों की रजामंदी से शादी की। शादी बहुत जल्दी में की, क्योंकि प्रज्ञा के पिता की तबीयत काफी खराब हो गई थी। ऐसे में हम उनके सामने परिणय सूत्र में बंधना चाहते थे।

 एक दूसरे के इमोशंस को समझते हैं, तकरार होने पर बोल देते हैं सॉरी

 ाहले जब तकरार होती थी, तो वह लंबे समय तक चलती थी। इससे घर से लेकर ऑफिस तक में तनाव होता था, लेकिन धीरे-धीरे एक-दूसरे को समझने लगे और तकरारें भी हल्की-फुल्की हो गईं। अब जब भी लड़ाई होती, तो गलती करने वाला सॉरी बोलकर भूल सुधार कर लेता है। सॉरी बोलते ही सब ठीक हो जाता है। प्रज्ञा सिंह कहती हैं कि वैसे तो उन्हें अमित में सभी बातें अच्छी लगती है, लेकिन उनकी सादगी और सच्चाई के साथ आगे बढ़ने वाली दो ऐसी बातें हैं, जो मैं उनमें हमेशा देखना चाहती हूं। * साभार-भास्कर डॉट कॉम

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