डॉ मोहन भागवत ने संयमित भाषा की वकालत की
मुंबई। कथित धर्म संसद में कथित तौर हिंदू और हिंदुत्व पर कतिपय साधु-संतों द्वारा कही गई बातों से आरएसएस प्रमुख डॉ मोहन भागवत इत्तेफाक नहीं रखते। उन्होने धर्म संसद से निकली बातों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह हिन्दू की परिभाषा नहीं हो सकती। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत ने कहा कि धर्म संसद में दिए गए अपमानजनक बयान हिंदू विचारधारा को परिभाषित नहीं करते हैं।
आरएसएस प्रमुख नागपुर में एक अखबार के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित हिंदू धर्म और राष्ट्रीय एकता व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने धर्म संसद के आयोजनों में कही गई बातों पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा, धर्म संसद के आयोजनों में जो कुछ भी निकला, वह हिंदू शब्द की परिभाषा नहीं है। उसके पीछे हिंदू कर्म या हिंदू दिमाग था। संघ प्रमुख ने कहा कि व्यक्तिगत लाभ या दुश्मनी को देखते हुए गुस्से में कही गई बात हिंदुत्व नहीं हो सकता है। उन्होने संयमित भाषाशैली की वकालत की। गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रयागराज में माघ मेले में धर्म संसद के आयोजन के दौरान भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने और मुस्लिमों को अल्पसंख्यक न मानने का फैसला लिया गया। मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए गए थे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में कालीचरण महाराज ने महात्मा गांधी के लिए अपशब्द कहे थे। छग सरकार ने एफआईआर दर्ज कर कालीचरण महाराज को जेल भेज दिया था।