चुनाव की आहट से ही नवंबर के बाद नहीं बढ़े रेट
नई दिल्ली। डीजल-पेट्रोल के रेट में बीते 3 माह से बनी स्थिरता 5 राज्यों के चुनाव निपटने का इंतजार कर रही है। खबर है कि चुनाव के नतीजे आने के बाद फिर दाम बढें़गे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में जो इजाफा हुआ है,उससे वाहन चालकों को पेट्रोल 15 रुपए और डीजल 12 रुपए तक महंगा मिल सकता है।
सरकार अपनी भूमिका से करती है इनकार, लेकिन .....
जानकारों के मुताबिक कच्चे तेल के दाम 8 साल के हाई लेवल पर जा पहुंचे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे पहले 2014 में कच्चे तेल के दाम 95 डॉलर के पार गए थे। 1 दिसंबर 2021 को कच्चे तेल का दाम 69 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। यानी ढाई महीने के भीतर कच्चे तेल के दामों में 37 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक जल्द ही ये 100 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा भी पार कर जाएगी। सरकार भले ही पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करने में अपनी भूमिका से इनकार करती हो, लेकिन बीते सालों में ऐसा देखा गया है कि चुनाव के दौरान सरकार जनता को खुश करने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाती है।
एक्साइस ड्यूटी कम कर दी थी राहत
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने की घोषणा की थी। अगले ही दिन देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आई और कई राज्यों ने भी पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम किया। इससे आम आदमी को राहत मिली थी। इसके बाद से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं। पिछले करीब साढ़े तीन महीने से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि इसी दौरान कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी आई है।