ओबीसी आरक्षण मामले में गलत बयानी पर सांसद विवेक तन्खा का केस
जबलपुर । ओबीसी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बयान देने के प्रकरण में कांग्रेस नेता एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने गलत बयानबाजी का आरोप लगाते हुए 10 करोड़ रुपए की मानहानि को केस दायर किया है। इसी मामले में सोमवार को जबलपुर जिला कोर्ट ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा व मंत्री भूपेंद्र सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 फरवरी की तारीख मुकर्रर की गई है।
10 करोड़ की मानहानि का दावा किया है
सांसद विवेक तन्खा की ओर से 6 दिन पहले उनके अधिवक्ता एवं राज्य के पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर ने क्रिमिनल और सिविल सूट फाइल कर 10 करोड़ रु पए मानहानि का दावा किया है। कोर्ट को बताया गया कि ओबीसी मामले में सीएम शिवराज सहित उक्त तीनों नेताओं ने गलत बयानबाजी की और सांसद विवेक तन्खा पर झूठा आरोप लगाया। भाजपा नेताओं ने तन्खा की छवि ओबीसी विरोधी बताने की कोशिश की। मामले में लीगल नोटिस जारी कर सीएम सहित तीनों नेताओं से तीन दिन के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने के लिए कहा गया था। तीनों नेताओं ने अपनी गलती भी नहीं स्वीकार की। इस कारण उन्हें कोर्ट की शरण में आना पड़ा।
तन्खा का ट्वीट, न्याय के हाथ धीमे जरूर हैं, पर लंबे हैं
पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर ने बताया कि मेरे पक्षकार विवेक तन्खा पर ओबीसी मामले में गलत बयानी की गई। उनके बारे में वो बातें कही गई, जो मेरे पक्षकार ने न तो याचिका में लगाई थी और न ही सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रि या के दौरान ही ऐसा कुछ बोला था। नोटिस जारी होने पर राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे साझा किया। तन्खा ने ट्वीट कर कहा है कि ‘मुङो मेरे वकीलों से सूचना प्राप्त हुई है कि आज हमारे 10 करोड़ की मानहानि के दावा में जबलपुर कोर्ट ने सीएम व अन्य प्रतिवादी पक्षकारों को जवाब प्रस्तुत करने नोटिस आदेशित किया है। अगली पेशी 25 फरवरी। न्याय के हाथ धीमे जरूर हैं, पर लम्बे हैं’।
सुको की याचिका में तन्खा ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्यप्रदेश में ओबीसी सीटों के निर्वाचन पर रोक लगाए जाने के बाद सीएम शिवराज सिंह, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इसके लिए विवेक तन्खा को जिम्मेदार ठहराया था। दावा किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका के चलते ऐसा आदेश हुआ। इसे मिथ्या और आधारहीन बताते हुए विवेक तन्खा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर ने 19 दिसंबर को 10 करोड़ रु पए मानहानि का दावा करते हुए सीएम सहित तीनों नेताओं को नोटिस भेजा था।