सांसद प्रज्ञा के बयान पर दिग्विजय बोले-औषधि है तो लिया करें..!
भोपाल। शराबबंदी, शराबपूर्ति और शराब के एल्कोहल रूप को औषधि को लेकर चले बयानों के तीर से मध्यप्रदेश की सियासत में खलबली मची है। शिवराज सरकार की नई आबकारी नीति पर हमलावर कांग्रेस की बयानबाजी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री व तेज तर्रार भाजपा नेता उमा भारती का ट्वीट चर्चा में है जिसमें उन्होने कहा है कि मध्यप्रदेश में शराबबंदी-नशाबंदी होकर रहेगी। उधर, भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ने मीडिया के सामने कहा कि आयुव्रेद में अल्कोहल को औषधि माना गया है, वहीं प्रज्ञा सिंह के इस बयान के बारे में पूछे जाने पर पूर्व सीएम दिग्विजय ने यह कहकर तंज कसा कि औषधि है तो लिया करें..।
उमा भारती ने दी नई डेट 14 फरवरी
खबरों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती 14 फरवरी से शराबबंदी-नशाबंदी अभियान शुरू करने जा रही हैं। उनका ट्वीट चर्चा में है जिसमें उन्होने कहा है कि मेरी प्रथम चरण की बातचीत आरएसएस के वरिष्ठ स्वयंसेवकों, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से हो चुकी है। अगला चरण 14 फरवरी के बाद शुरू होगा। उमा भारती ने लिखा है कि शराबबंदी-नशाबंदी मध्यप्रदेश में होकर रहेगी। एमपी में नई शराब नीति को शिवराज कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद उमा भारती लगातार कांग्रेस के निशाने पर रहीं और कांग्रेस ने पूछा था कि उमा भारती के शराबबंदी अभियान का क्या हुआ। दरअसल,इससे पहले पूर्व सीएम उमा भारती ने 8 मार्च 2021 और इसके बाद 15 जनवरी 2022 से अभियान शुरू करने की बात कह चुकी हैं। हालांकि उमा भारती ने अभियान की डेट बढ़ाने की पीछे वाजिब कारण बताते हुए यह भी कहा है कि मध्यप्रदेश में पूर्ण शराबबंदी, नशाबंदी अभियान प्रारंभ करने में कोरोना काल के बीच कठिनाई रही,क्योंकि अभियान में राजनीतिक निरपेक्ष लोगों की भागीदारी हो यह सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण कार्य है।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने चुटकी ली
इस बीच भोपाल में सांसद प्रज्ञा सिंह ने मीडिया के सामने कहा कि शराब सस्ती हो या महंगी,शराब औषधि का काम करती है,उसमें अल्कोहल होता है और आयुव्रेद में इसे औषधि माना जाता है। इसे सीमित मात्र में लेना औषधि के समान है और असीमित मात्र में यह जहर है। उन्होने कहा कि इसके नफा-नुकसान को समझकर अधिक लेने वालों को बंद करना चाहिए। साध्वी प्रज्ञा के इस बयान के बारे में पूछे जाने पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने चुटकी ली और यह कहकर आगे बढ़ गए कि औषधि है तो लिया करें ...!