सपा, प्रियंका और मायावती तैयारी करते रह गईं,फिलहाल ऑनलाइन कैम्पेन मजबूरी
लखनऊ। भाजपा 365 दिन 24 घंटे चुनावी मोड में रहती है, यह बात कोरोना की छाया में हो रहे पांच राज्यों के चुनाव का ऐलान होने के साथ ही लगी निर्वाचन आयोग की बंदिशों के बीच मैदान में उतरने वाली पार्टियों की तैयारियों के तुलनात्मक आंकड़े से साबित हो गई। प्रचार अभियान में बंदिशें लागू होने के साथ भाजपा विरोधी पार्टियों को फिलहाल ऑनलाइन कैम्पेन की मजबूरी रहेगी, वहीं भाजपा के स्टार कैम्पेनर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते 60 दिनों में प्रचार का वो खेला कर गए,जिसकी धमक वोटिंग तक जारी रहेगी। यूपी में चुनाव का ऐलान हो गया है। राज्य में 7 फेज में 25 दिन में चुनाव हो जाएंगे। साथ ही, चुनाव आयोग ने राज्य में 15 जनवरी तक रैली, सभा, पदयात्ना, साइकिल यात्ना, नुक्कड सभाएं, रोड शो करने पर रोक लगा दी है। इसकी वजह कोरोना की थर्ड वेव को बताया है। इसके चलते राजनीतिक दलों को कम से कम अगले 7 दिन तक कैंपेनिंग ऑनलाइन ही करनी पड़ेगी, लेकिन भाजपा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उसके सबसे बड़े स्टार कैंपेनर प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी चुनावी तारीख के ऐलान से पहले ही प्रदेश में एक के बाद एक रैलियों का खेला करके अपना काम पूरा कर चुके हैं।
योजनाओं के शिलान्यास, उद्घाटन की झड़ी लगा दी
चुनाव की आहट के साथ ही पीएम मोदी ने नवम्बर, दिसंबर और जनवरी की शुरुआत में यूपी को ज्यादातर कवर करने वाले इलाकों में चुनावी रैलियों-सभाओं के साथ योजनाओं के शिलान्यास, उद्घाटन और जनता के बीच सौगातों की झड़ी लगा दी। ताबड़तोड़ रैलियों के मेले में लाखों लोगों के बीच पीएम मोदी ने वो सब कर दिखाया जिसकी चुनाव अभियान में जरूरत होती है। सिर्फ 9 जनवरी की यूपी की राजधानी लखनऊ की रैली चुनाव आयोग के ऐलान के कारण निरस्त हुई। राजनीतिक विश्लेषक भाजपा के खाते में प्रचार अभियान का अच्छा खासा प्रतिसाद मिल चुका मान रहे हैं।
भाजपा विरोधियों की तैयारी ही होती रही
पीएम मोदी के प्रचार की तुलना में यूपी की सत्ता छीनने को आतुर राजनीतिक दल तैयारी करते ही रह गए। हालांकि समाजवादी पार्टी के एक मात्र चेहरे अखिलेश यादव ने बीते दो माह से विजय यात्र के जरिए अधिकांश यूपी को कवर कर चुके हैं और 25 से ज्यादा सभाएं कर चुके हैं, लेकिन बड़ी सभा नहीं कर पाए, हालांकि विजय यात्र में खासी भीड़ जुटाने में कामयाब रहे। वहीं करीब एक साल से सक्रिय कांग्रेस की महासचिव और यूपी में पार्टी का चेहरा बनी प्रियंका गांधी वाड्रा ने ‘मैं लड़की हूं..लड़ सकती हूं..’कैम्पेन से यूपी के कई शहरों में अच्छा प्रदर्शन किया और प्रतिज्ञा यात्र निकाली, लेकिन यहां राहुल गांधी यूपी में एक भी सभा नहीं कर पाए। प्रचार में सबसे पीछे कभी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली बसपा प्रमुख मायावती रहीं। मायावती ने भले ही ब्राम्हणों के सम्मेलन से शुरुआत की, लेकिन वे मात्र एक बड़ी रैली कर पाईं और बैठकों पर जोर दिया। अब कोरोना प्रोटोकाल में वे बड़ी रैली नहीं कर पाएंगी।
प्रधानमंत्री की रैलियों ने बनाया माहौल
16 नवंबर को सुल्तानपुर में 341 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया। 19 नवंबर को बुंदेलखंड दौरे में महोबा का अर्जुन बांध परियोजना का उद्घाटन किया। 19 नवंबर को झांसी में डिफेंस कॉरिडोर देश को सौंपा। झांसी के जरिए बुंदेलखंड को सौगात दी। 20 नवंबर को लखनऊ में डीजीपी-आईजी सम्मेलन में शामिल हुए। दो दिन लखनऊ में रहे। 25 नवंबर को जेवर में जनसभा संबोधित की। जेवर एयरपोर्ट का शिलान्यास किया। 7 दिसंबर को गोरखपुर के एम्स के अलावा एक बड़ा फर्टीलाइजर प्लांट का लोकार्पण किया। 11 दिसंबर को बलरामपुर में 9,600 करोड़ के सरयू कनाल प्रोजेक्ट का लोकार्पण किया।14 दिसंबर को वाराणसी में 339 करोड़ के काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का लोकार्पण किया। 18 दिसंबर को शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखी। 21 दिसंबर को प्रयागराज के परेड मैदान में दो लाख से अधिक महिलाओं को संबोधित किया। 23 दिसंबर को काशी में पीएम की जनसभा हुई। इस दौरान उन्होंने काशी को 1500 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात दी। 28 दिसंबर को कानपुर में करीब 3 घंटे रहे। आईआईटी के दीक्षांत समारोह और फिर निराला नगर रेलवे मैदान में लोकार्पण और शिलान्यास किया। 2 जनवरी को पीएम नरेंद्र मोदी ने मेरठ को 700 करोड़ की लागत से बनने वाले खेल विश्वविद्यालय की सौगात दी।