सराफा कारोबारी की बेटी प्रिया सराफ को राज्यपाल ने दी उपाधि
जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीयू)के 33वें दीक्षांत परेड में जबलपुर में रह रहीं और यहां से बाहर जाकर नाम कमा रही बेटियों का जलवा दिखा। विज्ञान और डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाली दो बेटियों शिवानी चौरिसया और अशिता दुबे ने 8-8 गोल्ड मेडल लाकर अपनी प्रतिभा दिखाई और माता-पिता सहित गुरुजनों का गौरव बढ़ाया। सराफा करोबारी सत्यप्रकाश-मीना सराफ की बेटी एवं यूपी के मऊ में असिस्टेंट कमिश्नर विवेक कौशल की पत्नी प्रिया सहित सभी पदकधारियों को मप्र के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने सम्मानित किया। जबलपुर की प्रतिभाशाली बेटी एवं 2018 में सिविल जज की परीक्षा में टॉपर रही पूर्वी तिवारी को भी गोल्ड प्रदत्त किया गया। पूर्वी तिवारी अभी बैतूल में पदस्थ हैं, उन्हें एलएलएम की परीक्षा में टॉप करने पर गोल्ड मेडल मिला।
गर्भवती महिलाओं की परेशानी दूर करना चाहती है डॉ अशिता
आरडीयू के पं. कुंजीलाल दुबे प्रेक्षागृह में आयोजित दीक्षांत समारोह में राष्ट्रगान के बाद राज्यपाल ने पीएचडी और गोल्ड मेडलिस्ट छात्र-छात्रओं को एक-एक कर सम्मानित किया। सर्वाधिक 8-8 मेडल शिवानी चौरिसया और डॉ अशिता दुबे को मिला। शिवानी विज्ञान तो अशिता दुबे डॉक्टरी में पीजी की पढाई कर रही हैं। अशिता शहर के प्रख्यात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष दुबे की बेटी हैं। गोल्ड मेडल लेने के बाद डॉ अशिता दुबे ने बताया कि 2019 में एमबीबीएस पास कर चुकी हूं। इसी के लिए 8 गोल्ड मेडल मिले हैं। अभी गायनोलॉजी से पीजी कर रही हूं। प्रेग्नेंट औरतों को प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों को दूर करना चाहती हूं। महामहिम राज्यपाल ने अर्थशास्त्र में शोभा पाल को उपाधि प्रदान की। शोभा, अनिमेष पाल की पत्नी व सिटी बंगाली क्लब के अध्यक्ष सुब्रत पाल की पुत्रवधु हैं।
एमपी की टॉपर है पूर्वी तिवारी
2018 में सिविल जज परीक्षा की टॉपर रही जज पूर्वी तिवारी को राज्यपाल ने एलएलएम की परीक्षा में टॉप करने पर गोल्ड मेडल से सम्मानित किया। पूर्वी ने बीए, एलएलबी में भी टॉप किया था। 2016 में बीए, एलएलबी करने के बाद सिविल जज वर्ग-2 की परीक्षा अपने पहले ही प्रयास पूरे एमपी में टॉप कर पास की। दीक्षांत समारोह में एक डी-लिट, 175 पीएचडी उपाधियां व 64 छात्नों को 128 गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। देवेंद्र शर्मा को 4 मास्टर डिग्री, 82 शोधपत्न, 7 पुस्तकों के प्रकाशन, 104 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शोध पत्न, 162 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के लिए डी-लिट उपाधि दी गई।