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नेताजी की यादें संजोय संग्रहालय लोकार्पित,केंद्रीय मंत्री प्रहलाद ने त्रिपुरी स्मारक में फहराया ध्वज

सेंट्रल जेल सहित शहर में कई जगह आजादी के महानायक को नमन 

जबलपुर। आजादी के महानायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 126वीं जयंती पर पूरे महाकोशल में उन्हें नमन किया गया। जबलपुर में तिलवाराघाट स्थित त्रिपुरी स्मारक पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटैल ने ध्वजारोहण कर गणतंत्र दिवस की शुरुआत की और कहा कि नेता जी को अब तक उचित सम्मान नहीं मिला था, पीएम नरेंद्र मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव में उन्हें सम्मान दिया गया। इसके साथ ही सेंट्रल जेल में नेता जी की याद में बना संग्रहालय आज से आम जनता के लिए समर्पित कर दिया गया, यहां नेताजी को अंग्रेजों के शासन में दो बार कैद किया गया था। सांसद राकेश सिंह के मुख्य आतिथ्य में सिटी बंगाली क्लब में विशाल रक्तदान शिविर आयोजित कर नेताजी सुभाष चंद बोस को याद किया गया।

 आम लोग सप्ताह में दो दिन देख सकेंगे संग्रहालय

सेंट्रल जेल में नेताजी के नाम पर बने मध्यप्रदेश के पहले संग्रहालय को आम जनता के लिए लोकार्पित कर दिया गया। जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर ने बताया कि अब हर शनिवार और रविवार को सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक आम लोग इस संग्रहालय का भ्रमण कर सकेंगे। इसके लिए अलग द्वार भी तैयार किया है। नेताजी के बैरक को संग्रहालय और परिसर को नेताजी के चित्रों से सजाया गया है। खास बात ये है कि ये सभी चित्र जेल के बंदियों द्वारा बनाए गए हैं। ये संग्रहालय नेताजी सुभाषचंद्र बोस वार्ड में बना है। इसमें नेताजी से जुड़ा जेल रजिस्टर, उनकी शयन पट्टिका, बेड़ियां, उस समय बंदियों के काम में उपयोगी चक्की, गणवेश देखने को मिलेगी। आम लोग यह देख पाएंगे कि किस तरह नेताजी जी ने जेल में जीवन व्यतीत किया था।

 सेंट्रल जेल के बंदी ही रहे इंजीनियर-कारपेंटर

 जबलपुर सेंट्रल जेल का नामकरण नेताजी के नाम पर किया गया, जबलपुर से नेताजी का खास नाता रहा है। जबलपुर में ही पहली बार नेताजी को 1939 में अखिल भारतीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया था। तब उन्होंने महात्मा गांधी के प्रमुख सहयोगी और प्रत्याशी पट्टाभि सीतारमैया को हराया था,इसी की याद में तिलवारा घाट एवं कमानिया गेट को त्रिपुरी स्मारक बनाया गया। आजादी की लडाई में दो बार 1933 और 1934 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस को अंग्रेजों ने जबलपुर के सेंट्रल जेल में ही कैद कर रखा था। अब उनके उसी बैरक को संग्रहालय बनाया गया है। संग्रहालय को बनाने में खुद कैदियों ने ही इंजीनियर और कारपेंटर की जिम्मेदारी निभाई। दीवारों की चित्रकारी से लेकर गार्डन तक बंदियों ने तैयार किए हैं। नेताजी यहां पहली बार 6 माह और दूसरी बार एक सप्ताह बंद रहे। 13 जून 2007 को इस जेल का नाम केंद्रीय जेल जबलपुर से बदलकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस किया गया था। 

 रक्तदान और पुष्पांजलि से याद किया नेताजी

 सिद्धिबाला बोस लायब्रेरी सिटी बंगाली क्लब में सांसद राकेश सिंह ने रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया गया। सचिव प्रकाश साहा ने अनुसार अनुश्री वेलफेयर सोसायटी व नेताजी सुभाष चंद बोस निशुल्क रक्तदान ग्रुप द्वारा एकत्र रक्त जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को प्रदत्त किया गया। आयोजन में विधायक लखन घनघोरिया, विनय सक्सेना, दिनेश यादव, जगतबहाुदर सिंह अन्नू सहित अनेक कांग्रेस नेता एवं सिटी बंगाली क्लब के अध्यक्ष सुब्रत पाल,अजय घोष, श्यामल मुखर्जी, डीके रॉय, सुरजीत गुहा आदि उपस्थित थे। नगर कांग्रेस द्वारा श्रीनाथ की तलैया स्थित नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।

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