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सुप्रीम व्यवस्था - ‘ट्रिपल टेस्ट नियम’ से ही तय होगा ओबीसी आरक्षण

चुनाव में आरक्षण: कई राज्यों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

 नई दिल्ली। ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बिना ट्रिपल टेस्ट नियम के प्रदेश में चुनाव न कराए जाएं। ट्रिपल टेस्ट नियम के तहत ही आरक्षण तय किया जाए। जिसके बाद मध्य प्रदेश में पंचायत के चुनाव आयोजित करवाए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के सभी अन्य राज्य भी आरक्षण नियम का पालन अवश्य करें। इसके साथ ही कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका का निराकरण कर दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 दिसंबर को पंचायत चुनाव में ओबीसी का रिजर्वेशन खत्म करने के निर्देश दिए गए थे। जिसके बाद मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव को निरस्त कर दिया गया था। इस पर केंद्र सरकार द्वारा भी याचिका दायर कर 17 दिसंबर के आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी। वैकल्पिक रूप से 4 महीने के लिए चुनाव टाले जाएं और 3 महीने के भीतर आयोग से रिपोर्ट तैयार करवाई जाए। 

जानिए ..क्या है ट्रिपल टेस्ट ... 

पहला - एक आयोग का गठन होता है। जो देखता है कि संबंधित समुदाय, जिसके आरक्षण प्रतिशत में घट-बढ़ की जा रही है, उस पर इसका क्या असर होगा। अगर किसी श्रेणी में आरक्षण बढ़ाया जाना है, तो उसमें इसकी जरूरत है भी या नहीं. दूसरी श्रेणियों पर उसका क्या असर होगा।

 दूसरा - आयोग की सिफारिशें लागू करते वक्त स्थानीय निकायों के लिए विभिन्न श्रेणियों के आरक्षण का प्रतिशत सही तरीके विभाजित करने की प्रक्रिया चलाई जाती है, ताकि किसी श्रेणी के साथ कोई भेदभाव या अन्याय की स्थिति न बने।

 तीसरा - आरक्षण के प्रतिशत में तब्दीली इस तरह से की जाए कि सभी श्रेणियों के कुल आरक्षण की अधिकतम सीमा 50} से अधिक न होने पाए। 

मप्र में ओबीसी आयोग 4 माह में देगा रिपोर्ट,याचिका निष्प्रभावी

 मध्यप्रदेश सरकार ने पिछड़ा वर्ग की स्थिति जानने के लिए मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन किया है। आयोग चार माह में अपनी रिपोर्ट देगा। इसके अलावा राज्य सरकार ट्रिपल टेस्ट के नियमों को पूरा करने के लिए राज्य में ओबीसी वर्ग का डाटा भी तैयार करा रही है। इस व्यवस्था के बाद अब मध्य प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अध्यादेश खत्म हो चुका है और चुनाव रद्द हो गए हैं। इसलिए इस संदर्भ में पुनर्विचार याचिका निष्प्रभावी मानी जा रही है।

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