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दिल्ली-मुंबई में बढ़ रहा कोरोना...प्रदेशवासी नए साल के स्वागत में होश न खोना..

आज 2021 की विदाई का सेकंड लास्ट डे है। नवागत पुलिस कमिश्नर प्रणाली साल के अंतिम दिन गड़बड़ करने वालों की पूरी खैर-खबर लेने को तैयार है। पुलिस से ज्यादा हमें ही अपनी चिंता करने की जिम्मेदारी का भार उठाना है। दिल्ली-मुंबई में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और प्रतिबंध भी अपने पैर पसारते जा रहे हैं। पर मध्यप्रदेश में अभी कोरोना के नाम पर रात्रिकालीन कर्फ्यू की व्यवस्था ही प्रतिबंध के नाम पर की गई है। भोपाल-इंदौर में मामले बढ़ रहे हैं लेकिन अभी महज ऊंट के मुंह में जीरा की तरह ही हैं। लेकिन नए वैरिएंट की आहट दस्तक दे चुकी है। मामले कम हैं, इसलिए सरकार की कोशिश यही है कि आर्थिक गतिविधियों पर अंकुश लगाकर प्रदेश की आबादी के पैरों पर बेवजह कुल्हाड़ी मारने से जितना हो सके बचा जाए। मगर दूसरी लहर गवाह है कि जब कोरोना कहर बनकर प्रचंड रूप लेता है, तब चारों तरफ हाहाकार मच जाता है। आर्थिक गतिविधियों की चौतरफा मार पड़ती है। फिर किसी की बल्ले-बल्ले होती है तो वह निजी अस्पतालों और दवा विक्रेताओं की। ऐसे में भले ही सरकार की तैयारी कितनी भी चाक-चौबंद हो लेकिन महामारी सरकार को भी बेचारी बनाने में कोई संकोच नहीं करती। तो प्रिय प्रदेशवासियों नए साल के स्वागत में होश न खोना, क्योंकि अपनी बेहोशी का सौ फीसदी दुरुपयोग करने में कोरोना कतई संकोच नहीं करता। और फिर दिल्ली-मुंबई से प्रदेश की राजधानी भोपाल और आर्थिक राजधानी इंदौर महज एक-सवा घंटे की हवाई दूरी पर ही है, तो रेल और सड़क मार्ग से भी दूरी औसतन दस से पंद्रह घंटे की ही है। आवागमन निर्बाध तौर पर जारी है। मास्क, सेनेटाइजर, दो गज की दूरी अभी वार्मअप हो रही हैं और टेस्टिंग की प्रक्रिया जॉगिंग कर रही है। ऐसे में कोरोना के नए वैरिएंट ने दौड़ लगा दी, तो हमारी व्यवस्थाओं को ठेंगा दिखाते हुए बाजी मारने में भी देर नहीं लगाएगा। और फिर हम सब कोरोना की दूसरी लहर की तरह बेचारे ही नजर आएंगे। वैसे अच्छा ही है कि पंचायत चुनाव रद्द हो गए, भले ही ओबीसी आरक्षण बहाना बन गया हो। अच्छा ही है कि गांव-गांव में चुनावी भीड़ जमा होने से बच गई। अभी दर्द चुनाव लड़ने से वंचित हुए प्रतिस्पर्धियों को ही है। वरना खामियाजा मतदाताओं के भी उठाने की संभावना बन सकती थी। अभी नए साल के पहले पखवाड़े में ही मकर संक्रांति का स्नान पर्व भी आ रहा है। पिछली दफा हरिद्वार में सामूहिक स्नान का खामियाजा हमने उठाया है, तो सामूहिक स्नान कर पुण्य अर्जित करने का अवसर हमें फिलहाल त्यागना है। ताकि कोरोना को ओट लगाई जा सके। साथ ही सरकार भले ही कोरोना को नियंत्रण में मानते हुए जनभावनाओं की आर्थिक स्थितियों का ज्यादा ख्याल रख रही हो लेकिन हमें अपना ख्याल रखते हुए भीडभाड़ में जाने से परहेज करना ही चाहिए। सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है कि 15 से 18 वर्ष के युवाओं को को-वैक्सीन का डोज लगाने की तैयारी हो चुकी है तो 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को बूस्टर डोज लगाने की शुरुआत हो रही है। लेकिन खतरा 15 साल से कम उम्र के उन बच्चों को भी है,जिन्हें कोई डोज नहीं लगा है। और उन बीस लाख लोगों को भी दूसरा डोज जल्दी लगवाना चाहिए, जो अभी तक इससे वंचित हैं। मामले अभी भले ही कम हों, लेकिन दस्तक करीब दो दर्जन जिलों तक पहुंच गई है तो कुछ मरीजों की मौत भी हुई है। तो हमारी लापरवाही ही हम पर भारी न पड़ जाए, इसलिए सरकार से ज्यादा खुद हमें ही हमारी चिंता करनी है। तो जिस तरह चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने वर्चुअली जन्मदिन मनाकर संदेश देने की कोशिश की है कि भीड़ में न जाएं। उसी तरह हमें भी खुशियों के अवसरों को वर्चुअली साझा करने का संकल्प लेना चाहिए। साथ ही भीड़भाड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। इसके साथ ही मास्क, सेनेटाइजर और दो गज दूरी जैसी सावधानियों पर पूरा अमल करते हुए थोड़ा सा संशय होने पर भी टेस्टिंग करा लेना चाहिए। आइसोलेट होने में देरी नहीं करना है, तो जरूरत पड़ने पर अस्पताल जाने में भी देरी नहीं करना है। तो डरें नहीं, लेकिन जागरूक रहें। नए साल का स्वागत दिल से करें, भीड़भाड़ का हिस्सा बनकर कतई नहीं। ** क़लमकार कौशल किशोर चतुर्वेदी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं
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