बनाया है, जिसके बारे में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र ने पत्रकारों को जानकारी दी। गृह मंत्री ने एक सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि इस सिस्टम को लेकर आईएएस और आईपीएस में कोई अंतरविरोध नहीं हैं, बल्कि दोनों में पर्याप्त समन्वय है।
पुलिस के पास यह होंगे अधिकार..............
पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस के पास एनएसए, जिला बदर करने, अनैतिक व्यापार अधिनियम, विधिविरूध क्रिया कलाप अधिनियम, मोटरयान अधिनियम, राज्य सुरक्षा अधिनियम की कुछ धाराओं को संशोधित कर अधिकार दिए गए हैं। इनमें जो अधिकार कलेक्टर या जिला प्रशासन के अफसरों को थे वे अब राज्य शासन ने पुलिस को दे दिए हैं। डीसीपी और एसीपी को प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के मामलों के अधिकार, धरना-प्रदर्शन की अनुमति भी देना, कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होने पर बल प्रयोग और गोली चालन का अधिकार भी पुलिस के पास होगा।
एडीजी या आईजी रैंक के अफसर बनेंगे कमिश्नर................
गृह मंत्री डॉ. मिश्र ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि एडीजी या आईजी रेंक के अफसर पुलिस कमिश्नर बनेंगे और दो-दो डीआईजी रैंक के अफसर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त बनेंगे। पुलिस उपआयुक्त के पद पर एसपी रैंक के आठ-आठ अफसर होंगे और भोपाल में एएसपी रैंक के 10 अफसरों को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त बनाया जाएगा। उन्होने बताया कि इंदौर में 12 अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त होंगे,डीएसपी रैंक के अफसर सहायक पुलिस आयुक्त बनेंगे। भोपाल में 33 और इंदौर में 30 सहायक पुलिस आयुक्त होंगे। वहीं पुलिस कमिश्नर सिस्टम से बाहर हुए जिले के बाकी हिस्सों के लिए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण का पद भी बनाया गया है। दोनों जिलों में एक-एक ग्रामीण एसपी होंगे, जो पुलिस कमिश्नर सिस्टम के बाहर रहेंगे।