सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद सियासी घमासान में पूर्व सीएम ने शिवराज से की चर्चा
भोपाल। पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मची सियासी घमासान में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा है कि मध्य प्रदेश के पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण पर लगी न्यायिक रोक चिंता का विषय है। उमा भारती ने एक के बाद एक तीन ट्वीट कर कहा कि मेरी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से फोन पर बात हुई है तथा मैंने उनसे आग्रह किया है कि ओबीसी आरक्षण के बिना मध्य प्रदेश में पंचायत का चुनाव प्रदेश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी के साथ अन्याय होगा। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा ओबीसी आरक्षित पदों को रि-नोटिफाई किए जाने के निर्देश को लेकर गरमाई सियासत के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह व प्रमुख सचिव विधि से बात की है। बताया जा रहा है मंत्रलय में हुई बैठक में इन मुद्दों के साथ ही प्रदेश में विधि और विधायी व्यवस्था से जुड़े अन्य मसलों पर चर्चा की गई।
विवेक तन्खा के नोटिस पर भी देखा कानूनी पहलू..................
पंचायत चुनाव को लेकर कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने के मंत्री भूपेंद्र सिंह के बयान के बाद राज्य सभा सांसद व कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने सीएम शिवराज, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और मंत्री भूपेंद्र सिंह को 10 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा है और अधिवक्ता की पांच लाख रुपए की फीस भी देने के लिए कहा है। विवेक तन्खा ने नोटिस में 3 दिन में माफी मांगने की बात भी कही है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री के साथ बैठक में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और प्रमुख सचिव विधि के बीच इन मुद्दों पर भी चर्चा होने की खबर है।
कुछ नहीं कहा तो भी नोटिस दे दिया: गृहमंत्री मिश्र..............
गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने कहा है कि कांग्रेस नेता विवेक तन्खा द्वारा 10 करोड़ रुपए के मानहानि नोटिस को लेकर सीएम ने तो कुछ कहा ही नहीं है, फिर भी उन्हें नोटिस दे दिया और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी कुछ गलत नहीं कहा है। कांग्रेस अपनी गलती छिपाने के लिए अदालत गई और अदालत गए तो विषय सामने आया है। कांग्रेस को जनता के सामने जाना चाहिए था,लेकिन उन्हें पता है कि जनता के सामने नहीं जीतेंगे।
याचिका में जो रिलीफ मांगी ही नहीं,उस पर कैसे आया निर्णय.................
ओबीसी के 18 से अधिक संगठनों ने रविवार को भोपाल में मंत्री भूपेंद्र सिंह की उपस्थिति में उन्ही के निवास पर बैठक कर राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष और विधायक गौरीशंकर बिसेन सहित उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव और खनिज संसाधन मंत्री बृजेंद्र सिंह को खरी-खरी सुना दी। खबर है कि ओबीसी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से इन मंत्रियों से कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट में जिस याचिका पर जो रिलीफ मांगी ही नहीं गई उस बिंदु पर ऐसा असंवैधानिक फैसला सुप्रीम कोर्ट ने कैसे सुना दिया जबकि मध्यप्रदेश शासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में 170 से अधिक शासकीय अधिवक्ता सहित दो-दो एडिशनल एडवोकेट जनरल नियुक्त हैं जिन्होने राज्य सरकार का पक्ष ही ठीक ढंग से नहीं रखा, न ही स्टेट इलेक्शन कमीशन का वकील अपनी बात रख पाया।