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जबलपुर शहर के बीच गांव की मेला संस्कृति के दर्शन

गढ़ा-गुलौआ में चंडी मेला की धूम,पारंपरिक बाजार की सतरंगी छटा 

जबलपुर। दीपावली के बाद से भारतीय परंपरा के अनुरुप प्रारंभ हो जाने वाले मढ़ई और चंडी मेले की परंपरा आज भी शहर के बीचों-बीच गढ़ा-गुलौआ जैसे प्राचीन जबलपुर में जीवित है। हालांकि समय के साथ इसके रुप-स्वरुप में परिवर्तन हुआ है, लेकिन आज भी गढ़ा गुलौआ चौक में हर साल की तरह इस साल भी चंडी मेला का आयोजन किया गया है। इसी श्रृंखला में भारतीय धर्म और संस्कृति की अनूठी झलक के साथ मेले की मौज-मस्ती और मिलन का एक अलग ही आनंद यहां देखने मिल रहा है। मेले में लगे झूले-खेल-खिलौने,लजीज व्यंजनों के स्टॉल-पारंपरिक खान-पान की वस्तुएं बच्चों, बूढ़ों और युवाओं सहित हर किसी को अपनी ओर खींच रहीं हैं। भाईदूज से शुभारंभ बता दें कि आज से श्री रानी दुर्गावती मित्र मंडल गुलौआ चौक गढ़ा जबलपुर द्वारा प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी दीपावली के बाद भाई दूज से दो दिवसीय चंडी मेले का आयोजन किया गया है। इस मेले में चंडी माता की स्थापना की गई व बच्चों के मनोरंजन हेतु आकर्षण झूलों के साथ-साथ घरेलू उपयोगी सामग्री खान-पान के स्टॉल यहां पर लगाए गए हैं। विसजर्न की रिकॉर्डिग देख रहे रानी दुर्गावती मित्र मंडल के सदस्यों द्वारा इस वर्ष जो दुर्गा माता रानी के विसर्जन के लिए स्वनिर्मित कुंड का निर्माण कर दुर्गा माता का विसर्जन किया गया था उसका भी यहां पर रिकॉडिर्ंग चलाई जा रही है। यह रिकॉर्डिग निरंतर 7 नवंबर रविवार के मध्य रात्रि तक चलेगी। श्री रानी दुर्गावती मित्र मंडल के अरुण जैन ने बताया है कि यहां पर ही मेले का आयोजन किया जाता है यहां से चंडी मेले की शुरुआत होती है। साथ ही शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों द्वारा यहां से चंडी-मढ़ई ले जाई जाती है। देवताल में चतुर्थी, पुरवा में पंचमी को भरेगा मड़ई मेला दूज और तीज पर गुलौआ के बाद चतुर्थी को देवताल और पंचमी को पुरवा में मड़ई मेला लगेगा। इसके साथ ही शहरी सीमा और इसकी सरहद से लगे ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, कूड़न, धनवंतरी नगर, तेवर, अधारताल, कटरा, कंचनपुर, संजय नगर, सुहागी, महाराजपुर सहित तमाम रहवासी क्षेत्रों में चंडी मेला के आयोजन किए जाएंगे।

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