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जीत गया देश का किसान,न टूटा अभिमान-न गया सम्मान, तीनों कृषि कानून वापस

गुरुनानक देव के प्रकाशोत्सव पर पीएम मोदी का ऐलान 

नई दिल्ली। लम्बे समय से दिल्ली की बार्डर पर मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों को काला कानून बताकर आंदोलन पर अड़े किसानों की जीत हो गई। गुरुनानक देव के प्रकाशोत्सव पर देश के नाम संबोधन देने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि तीनों कृषि कानून वापस लिए जा रहे हैं। मोदी ने कहा कि आंदोलन कर रहे किसान अपने घर लौट जाएं और प्रकाश पर्व मनाएं। यह घोषणा होते ही सियासत खदबदा गई और राजनीतिक दल इसके नफा-नुकसान का आंकलन करने लगे। वहीं आंदोलन के सूत्रधार राकेश टिकैत ने कहा है कि हम तब तक नहीं मानेंगे जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को संसद में रद्द नहीं कर देती।

 हमारी तपस्या में कोई कमी रह गई शायद: मोदी 

अपने 18 मिनट के संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को नेक नीयत के साथ लाई थी, लेकिन यह बात हम किसानों को समझा नहीं पाए। उन्होने कहा कि हमने ईमानदारी और सच्चे मन से किसानों तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन कुछ लोगों को समझा नहीं पाए। उन्होने कहा कि हो सकता है कि हमारी तपस्या में कोई कमी रह गई, लेकिन सरकार देश के लोगों का किसानों का सपना साकार करने संकल्पित रहेगी।

सत्याग्रह ने झुकाया अहंकार का सिर: राहुल गांधी

 इसके बाद एक तरफ जहां दिल्ली बॉर्डर पर किसानों ने जश्न शुरू कर दिया है। साथ ही बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया शुरु हो गई है। राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि टूट गया अभिमान, जीत गया मेरे देश का किसान। उन्होने कहा कि किसानों के सत्याग्रह से सरकार के अहंकार का सिर झुक गया। स्वराज आंदोलन के योगेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के मुंह से एमएसपी के बारे में सुनना चाहते थे। वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि किसानों की कुर्बानी से ये जीत मिली।

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