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कांग्रेस ने बताई मजबूरी की घोषणा, भाजपा बोली पीएम की समझदारी का निर्णय


कृषि बिल वापस लेने पर व्यापक प्रतिक्रियाएं , जय रेवाखंड ने काले कानून की प्रतियां जलाईं, कांग्रेस ने मिठाई बांटी,संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा-संघर्ष अभी खत्म नहीं

 जबलपुर। केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानून के लिए लाए गए तीन बिल वापस लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान की व्यापक प्रतिक्रिया रही। कांग्रेस ने इसे चुनावों के मद्देनजर मजबूरी में लिया गया निर्णय बताया है तो भाजपा का कहना है कि पीएम और केंद्र सरकार ने समझदारी का काम किया। वहीं अधिकतर किसान संगठनों ने इसे एक अच्छा निर्णय मानते हुए अब न्यूनतम समर्थन मूल्य पर केंद्र सरकार को फोकस करने की मांग करना शुरु कर दी है। इसके तहत फसल खरीदने की गारंटी सरकार से मांगी जा रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि किसानों का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है, वहीं जय रेवाखंड ने तीनों काले कानून की प्रतियां जलाकर विरोध किया। नगर कांग्रेस ने मिठाई बांटकर किसानों की जीत का जश्न मनाया। 

जय रेवाखंड ने किया काले कृषि कानूनों की वापिसी का स्वागत 

जन संगठन जय रेवाखंड के संस्थापक पं आर्दशमुनि त्रिवेदी ने केन्द्र सरकार द्वारा बनाए काले कृषि कानूनों की वापिसी का स्वागत किया है और संघर्ष करने वाले किसान संगठनों को बधाई भी देते हुए MSP पर उनके समर्थन की बात कही है। त्रिवेदी ने कहा कि जय रेवाखंड कृषि कानूनों के मसले पर किसानों के साथ है और किसान आंदोलन के प्रारंभ में ही काले कानून की प्रतियां जलाकर और गिरफ्तारी देकर जबलपुर में जोरदार प्रदर्शन कर कानून वापस लेने की मांग की थी जो लगातार रेवाखंड के जिलों में जारी रहा। उन्होंने कहा कि लोकसभा में पास करने के पहले ही सरकार को इस पर व्यापक चर्चा कर कानून बनाना था प्रमुख किसान संगठनों से बातचीत के बाद ही कानूनों का मसौदा बनना था। तब न आंदोलन होता और न ही इतना लंबा गतिरोध बनता। कृषि प्रधान देश में नीतियां कृषि व किसान हितैषी बनना चाहिए न कि उनके शोषण करने वाली। मंहगाई को देखते हुए MSP के दाम बढ़ने चाहिए और MSP से ही फसलों की बोली की शुरूआत मंडियों में होना चाहिए। यह कानून तुरंत से लागू हो।

 मृत किसानों को दे मुआवजा 

 वरिष्ठ विधिवेत्ता पं आर्दशमुनि त्रिवेदी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने जितनी जल्दबाजी में ये काले कानून बनाए थे उतनी ही देरी कानून वापिसी का निर्णय लेने में की। सबको पता है इस दौरान 700 से भी अधिक किसानों की मौत हो गई। अब सरकार को चाहिए कि वह मृत किसानों के परिवारों को मुआवजा दे। संयुक्त किसान मोर्चा ने मिठाई बांटी संयुक्त किसान मोर्चा जबलपुर द्वारा मालवीय चौक में किसान विरोधी कानून वापस लिए जाने की घोषणा पर मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। मोर्चा के दीपक पचौरी, सुबोध रिछारिया, अमित पांडे, राम रतन यादव, डाॅ घनश्याम यादव, एड रामकिशोर शिवहरे, एड राजेंद्र गुप्ता, बैजनाथ कुशवाहा, राजकुमार सिन्हा, एड ओ पी यादव, एड अन्जना कुररिया, डॉ भावना दीक्षित, रामराज पटेल, विवेक पटेल, अभिलाषा दीक्षित, आर.के.जैन, बलराज सिंह, देवेंद्र शुक्ला, गुरजीत सिंह, अजय, कृष्णा चौधरी, शिव चौधरी, मदन शर्मा, राजू विश्वकर्मा ने संघर्षरत किसानों, मजदूरों, छात्रों, युवाओं, महिलाओं, बुद्धिजीवियों सभी नागरिकों का हृदय से आभार।

-पीएम की कृषि कानून वापस लेने की घोषणा उदारता नहीं वोट की चोट के डर से मजबूरी है। यह सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों की कद्र करती तो एक साल आंदोलन नहीं चलता।

 दिनेश यादव, अध्यक्ष नगर कांग्रेस कमेटी 

प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार ने जो भी निर्णय लिया है सोच समझ कर लिया है, भाजपा हमेशा जनता के ही साथ है, आंदोलन एक साल तक क्यों चला, इस पर मैं कुछ नहीं कह सकता। 

 जीएस ठाकुर, नगर अध्यक्ष भाजपा 

कृषि कानून वापस होना किसानों की जीत है इसलिए सबको बधाई, लेकिन अब प्रधानमंत्री जी से आशा है कि वो एमएसपी को लेकर भी शीघ्र निर्णय लेंगे। फसल खरीदी गारंटी के संबंध में भी कानून की जरुरत है। 

 केके अग्रवाल,अध्यक्ष भारत कृषक समाज 

प्रधानमंत्रीजी ने एमएसपी को और प्रभावी करने एक समिति बनाने कहा है हम इसका स्वागत करने के साथ गैर राजनीतिक संगठनों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने आग्रह करते हैं। हमारा मानना है कि किसान की असली समस्या उसका बाजार में होने वाला शोषण है।

 राघवेंद्र पटेल, प्रचार प्रमुख भारतीय किसान संघ

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