मायूस पिता को बदल-बदल कर देते रहे बच्चे, फिर बोले..तुम्हें एक बच्चे का
अंतिम संस्कार करना है, किसी का भी कर दो..सब बच्चे ही हैं
भोपाल। हमीदिया हादसे में जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आ रही है और सिस्टम की वो क्रूरता सामने आई जिससे लोगों की रूह कांप जाए। मंगलवार को जिस पिता को बच्चे की लाश थमाई जा रही थी और इसे वह अपना बच्चा बताने से इनकार कर रहा था, बुधवार को उसके असल बच्चे का शव हमीदिया के पोस्टमॉर्टम हाउस में मिला। पिता ने बच्चे की पीठ पर गोल निशान से उसकी पहचान की। मौत आग लगने से हुई है। रतनपुर में रहने वाले मुकेश कुमार अहिरवार की पत्नी ललिता ने इसी रविवार को जेपी हॉस्पिटल में बच्ची को जन्म दिया था। मुकेश के मुताबिक, सोमवार रात आग लगने के बाद उसका बच्चा जीवित था। मंगलवार सुबह भी उसने बच्चे को जीवित देखा था। जब वह करीब 10 बजे बच्चे को देखने वार्ड में पहुंचा तो डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की मौत हो गई है। मुकेश बच्चे का शव लेने मचरुरी पहुंचा, जहां उसे एक जला हुआ बच्चे का शव थमा दिया गया। मुकेश ने कहा कि मेरा बच्चा जला नहीं था। अधिकारियों ने उसे दूसरा बच्चे का शव दिया। दलील दी गई कि ‘तुम्हें एक बच्चे का अंतिम संस्कार करना है, किसी का भी कर दो.. सब बच्चे ही हैं।’ मुकेश नहीं माने। उन्होंने दूसरे के बच्चे का शव लेने से इनकार कर दिया। कमला हॉस्पिटल में बच्चे को तलाशते रहे। बुधवार को नर्स उन्हें लेकर फिर मचरुरी पहुंची। यहां उसने अपने बच्चे के शव की पहचान की। नहीं मिल रहे बच्चे, एक नवजात के शव का होगा डीएनए टेस्ट हमीदिया हादसे में बच्चों की मौत का आंकड़ा 13 तक पहुंच गया है। मंगलवार देर रात दो बच्चों की मौत हो गई थी। बुधवार को एक और बच्चे ने दम तोड़ दिया। हालांकि सरकार ने अब तक इस अग्निकांड में 5 मौतें ही मानी हैं। हमीदिया हादसे में बच्चे के लापता होने का मामला सामने आया है। यहां बागसेवनिया की रहने वाली सोनाली मसाने पति अरुण मसाने ने नवंबर को बेटे को जन्म दिया था। अस्पताल वाले कह रहे हैं कि बच्चे की मौत हो गई है। वहीं, परिजन का कहना है कि शव उनके बच्चे का नहीं है। अब माता-पिता और बच्चे के शव का डीएनए सैंपल लिया जा रहा है। मैनेजमेंट ने अब तक 5 बच्चों की ही मौत की पुष्टि की है, लेकिन एक के बाद एक लगातार शव सामने आते जा रहे हैं। इससे मैनेजमेंट की नीयत पर शंका होने लगी है। जब पांच ही बच्चों की मौत हुई है तो फिर ये शव लगातार कहां से आ रहे हैं। रह-रह कर शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे जा रहे हैं तो कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें बिना पोस्टमॉर्टम के ही परिजन को दे दिया गया।